वाराणसी
जानलेवा हमले के आरोप में फंसे दो सगे भाई सबूतों के अभाव में बरी
वाराणसी। पैसे के लेनदेन के विवाद में युवक पर चाकू से जानलेवा हमला करने के मामले में वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायालय से दो सगे भाइयों को राहत मिल गई। अदालत ने गवाहों के पक्षद्रोही होने और साक्ष्यों के अधूरे रहने के कारण आरोप सिद्ध न होने पर दोनों आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
विशेष न्यायाधीश (आवश्यक वस्तु अधिनियम) सर्वजीत कुमार सिंह की अदालत ने दशाश्वमेध निवासी शरद यादव और उसके भाई छोटी उर्फ संजीव यादव को आरोप प्रमाणित न होने के आधार पर बरी कर दिया। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव, रोहित यादव और संदीप यादव ने अदालत में पैरवी की।
अभियोजन के अनुसार वादी सिद्धार्थ राय ने 6 दिसंबर 2023 को दशाश्वमेध थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि उसी दिन सुबह लगभग नौ बजे वह घाट पर टहल रहा था। इसी दौरान शरद यादव ने पैसे के लेनदेन के संबंध में बात करने के लिए उसे पांडेय घाट स्थित अपने होटल रीवा गेस्ट हाउस पर बुलाया।
वादी के अनुसार वह अपने परिचित चाचा निमाई चटर्जी को साथ लेकर गेस्ट हाउस पहुंचा, जहां शरद यादव ने उसके चाचा के साथ गालीगलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर उसके साथ भी मारपीट और गालीगलौज की गई।
आरोप के मुताबिक वह वहां से अपने घर जाने लगा तो शरद यादव और छोटी यादव ने गेस्ट हाउस से करीब 20 से 30 मीटर की दूरी पर उसे घेर लिया और जान से मारने की नीयत से उस पर चाकू से हमला कर दिया। इसके साथ ही लाठी-डंडों से भी प्रहार किए गए। मौके पर कुछ अन्य लोग भी मौजूद थे, जिन्हें वादी पहचान नहीं सका।
हमले के दौरान दोनों भाइयों ने उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी। घटना में वादी के बाएं सीने के ऊपर चाकू से दो स्थानों पर गंभीर चोटें आईं और शरीर पर लाठी-डंडों से भी कई घाव लगे।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में कुल नौ गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अदालत ने गवाहों के बयान और प्रस्तुत साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोप सिद्ध न होने पर दोनों भाइयों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
