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गोरखपुर

“छोटी पर सही बात – सही बात जो बचाये जान” के जरिए टूटेंगे सर्वाइकल कैंसर से जुड़े भ्रम

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भारत में हर 8 मिनट में सर्वाइकल कैंसर से महिला की मौत, शुरुआती जांच से पूरी तरह रोकी जा सकती है बीमारी

गोरखपुर। जनवरी माह को विश्वभर में सर्वाइकल कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर का उद्देश्य आम लोगों, विशेषकर महिलाओं तक वैज्ञानिक, सही और व्यवहारिक जानकारी पहुँचाना है, ताकि सर्वाइकल कैंसर को लेकर फैली गलतफहमियाँ दूर हों और समय रहते जीवनरक्षक कदम उठाए जा सकें। इसी क्रम में AIIMS गोरखपुर के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की ओर से एक साप्ताहिक जन-जागरूकता स्तंभ की शुरुआत की जा रही है।

इस स्तंभ का नाम “छोटी पर सही बात – सही बात जो बचाये जान” रखा गया है। इसके अंतर्गत प्रत्येक सप्ताह सर्वाइकल कैंसर से जुड़े किसी एक प्रचलित भ्रम और उससे जुड़ी सच्चाई को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं सही जानकारी से लाभान्वित हो सकें।

पहला भ्रम यह है कि सर्वाइकल कैंसर बहुत कम महिलाओं को होता है। सच्चाई यह है कि यह धारणा खतरनाक है। भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसरों में शामिल है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश में हर आठ मिनट में एक महिला की मृत्यु सर्वाइकल कैंसर के कारण होती है।

इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती अवस्था में इसके लक्षण या तो बहुत हल्के होते हैं या बिल्कुल दिखाई नहीं देते, जिसके कारण जांच न कराने पर इसका पता देर से चलता है। आंकड़े बताते हैं कि हर तिरपन महिलाओं में से एक महिला को जीवन के किसी न किसी चरण में सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा रहता है। महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि यदि समय पर जांच और बचाव के उपाय अपनाए जाएं, तो यह कैंसर पूरी तरह रोका जा सकता है।

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दूसरा भ्रम यह है कि सर्वाइकल कैंसर का खतरा केवल शादीशुदा या अधिक उम्र की महिलाओं को ही होता है। वास्तविकता यह है कि सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण HPV यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस है, जो यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है। इसी कारण यौन संपर्क में आई हर महिला को, चाहे वह शादीशुदा हो या नहीं, इस बीमारी का खतरा हो सकता है। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार, तीस वर्ष से अधिक उम्र की सभी महिलाओं को नियमित रूप से पैप टेस्ट या HPV टेस्ट कराना चाहिए, क्योंकि यह जांच बीमारी के शुरुआती बदलावों को पहचान लेती है, जब इलाज सरल और पूरी तरह सफल होता है।

तीसरा भ्रम यह है कि सर्वाइकल जांच कराने में बहुत अधिक दर्द या तकलीफ होती है। यही डर कई महिलाओं को जांच से दूर रखता है, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। पैप टेस्ट या HPV जांच एक आसान, कम समय में पूरी होने वाली और लगभग बिना दर्द की प्रक्रिया है। यह जांच किसी तरह का नुकसान नहीं करती, बल्कि सुरक्षा प्रदान करती है। जांच को लेकर शर्म या झिझक नहीं होनी चाहिए, क्योंकि शर्म बीमारी को बढ़ा सकती है, जबकि समय पर जांच बीमारी को रोक सकती है।

जागरूकता ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। यदि HPV संक्रमण समय रहते जांच में पकड़ में आ जाए, तो सर्वाइकल कैंसर पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। यह समय है कि चुप्पी और संकोच को तोड़ा जाए, सही जानकारी को अपनाया जाए और उसे दूसरों तक भी पहुँचाया जाए। हर महिला को यह जानने का अधिकार है कि एक साधारण सी जांच से उसकी जान बचाई जा सकती है।

यह साप्ताहिक जन-जागरूकता स्तंभ पूरे जनवरी माह जारी रहेगा। इसके तहत हर सप्ताह सर्वाइकल कैंसर से जुड़े नए भ्रम और उनकी सच्चाई साझा की जाएगी, ताकि जानकारी के अभाव में किसी भी महिला को अपनी जान न गंवानी पड़े।

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