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वाराणसी

छन्नूलाल को देखने पहुंचे सपा सांसद, ICU में आधे बेड खाली देख चौंके; प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

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BHU की व्यवस्था पर उठाए सवाल

वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक में बने आईसीयू में करीब 50 प्रतिशत बेड खाली पाए जाने की जानकारी मिलने के बाद चंदौली के सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। सांसद का आरोप है कि बेड खाली होने के बावजूद मरीजों को आईसीयू में जगह नहीं दिए जाने का सिलसिला चल रहा है।

निरीक्षण के दौरान उठे सवाल

बता दें कि, चंदौली लोकसभा से समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र से मिलने बीएचयू पहुँचे थे। सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक के पांचवें तल पर बने आईसीयू का निरीक्षण करने पर उन्होंने देखा कि लगभग आधे बेड खाली पड़े हैं। इस पर मौके पर मौजूद आईसीयू इंचार्ज से जब बेड खाली रहने की वजह पूछा गया तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जिससे सांसद असंतुष्ट रहे।

अखिलेश यादव के निर्देश पर दौरा

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सांसद ने पत्र में उल्लेख किया है कि वे सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर बीएचयू हॉस्पिटल में पंडित छन्नूलाल मिश्र को देखने गए थे। निरीक्षण के दौरान मिली स्थिति को देखते हुए सांसद ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया और उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच की मांग की है।

पत्र में लगाए गए आरोप — लापरवाही व संभावित दुरुपयोग

वीरेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि जब भी जनप्रतिनिधि या परिजन किसी मरीज के लिए डॉक्टरों की सलाह पर आईसीयू की मांग करते हैं तो उन्हें जवाब दिया जाता है कि आईसीयू में बेड उपलब्ध नहीं है, जबकि निरीक्षण में बेड खाली दिख रहे हैं। सांसद ने लिखा है कि बीएचयू हॉस्पिटल जनता के करों से निर्मित है और इसमें करोड़ों रुपये की लागत लगी है; यदि इसका उपयोग साजिशन या किसी तरह के दुरुपयोग से रोक दिया जा रहा है तो यह स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने डॉक्टरों की लापरवाही और कार्यशैली पर भी प्रश्न उठाए हैं और कहा है कि इससे अस्पताल में भ्रष्टाचार की आशंका पैदा होती है तथा काशी एवं आसपास के मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।

व्यवस्था सुधार की मांग

सांसद ने पत्र में साफ़ शब्दों में कहा है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए ताकि व्यवस्था में हो रही गड़बड़ियों और संभावित दुरुपयोग का खुलासा हो सके और आवश्यक सुधार किए जाएँ। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई तो वे इस मुद्दे पर लगातार आवाज़ उठाते रहेंगे ताकि मरीजों को उनकी ज़रूरत के अनुसार आईसीयू सुविधा मिल सके और सरकारी संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित हो।

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