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हेल्थ

गंदगी से फैलने वाली घातक बीमारी है अमीबा, जानिए कैसे करें बचाव?

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लक्षण दिखते ही हो जाएं सतर्क

विशेषज्ञों की चेतावनीः घरेलू नुस्ख़े नहीं, डॉक्टर की दवा ही है असली इलाज

नई दिल्ली। अमीबा (Amoeba) एक सूक्ष्म जीवाणु (protozoa) है। यह Entamoeba histolytica नामक परजीवी से होने वाला संक्रमण है। जब यह जीव आंत (Intestine) में पहुंचता है तो इसे अमीबायसिस (Amoebiasis) कहा जाता है। आम भाषा में इसे आंव या अमीबिक पेचिश भी कहते हैं।

कैसे होता है संक्रमण
अमीबा संक्रमण ज़्यादातर गंदे खाने-पीने की वजह से होता है। गंदा पानी पीने से जिसमें अमीबा के कीटाणु (cysts) मौजूद होते हैं, संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। सड़क का खुला खाना, ठीक से न धुले सब्ज़ी-फल, गंदे हाथों से खाना खाना या संक्रमित व्यक्ति के मल के संपर्क में आना इसके मुख्य कारण हैं। वहीं मक्खी और कीड़े भी भोजन पर बैठकर कीटाणु फैला सकते हैं।

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लक्षण दिखाई पड़ते ही सतर्क हों
अमीबा से होने वाली बीमारी के लक्षण कई तरह से सामने आते हैं। इनमें पेट दर्द और ऐंठन, बार-बार पतला दस्त जिसमें श्लेष्मा (mucus) या खून हो सकता है, उल्टी और जी मिचलाना प्रमुख हैं। इसके अलावा भूख न लगना, कमजोरी, थकान और वजन कम होना भी देखा जाता है। कई मामलों में तेज बुखार भी होता है। चिकित्सकों के अनुसार, संक्रमण गंभीर होने पर यह जिगर (Liver abscess) तक पहुंच सकता है।

बचाव ही सबसे सुरक्षित रास्ता
अमीबा से बचाव के लिए साफ-सफाई बेहद जरूरी है। पानी को हमेशा उबालकर या फ़िल्टर करके पीना चाहिए। खाना ढककर रखना चाहिए ताकि मक्खी न बैठ सके। खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोना अनिवार्य है। सड़क का खुला खाना खाने से बचें और फल-सब्ज़ी अच्छे से धोकर ही खाएं। लंबे समय तक दस्त की समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

इलाज में लापरवाही न करें
अमीबा का इलाज डॉक्टर द्वारा दी जाने वाली दवाओं जैसे मेट्रोनिडाज़ोल और टिनिडाज़ोल से होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल घरेलू नुस्ख़ों से यह पूरी तरह ठीक नहीं होता। इलाज अधूरा छोड़ देने से संक्रमण बार-बार हो सकता है।

अमीबा एक परजीवी से होने वाला आंत का संक्रमण है, जो गंदे पानी और खाने से फैलता है। इसके लक्षणों में दस्त, पेट दर्द और कमजोरी शामिल हैं। बचाव का सबसे अच्छा तरीका साफ-सफाई है, जबकि इलाज केवल डॉक्टर की सलाह से ही संभव है।

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