वाराणसी
गंगा की गिरती निर्मलता से डॉल्फिन का संकट गहराया, सीमित क्षेत्रों में सिमटी मौजूदगी
वाराणसी। काशी में गंगा की लगातार घटती निर्मलता का असर अब जलीय जीवों पर साफ दिखाई देने लगा है। खास तौर पर गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन की संख्या में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। एक समय ऐसा था जब वर्ष 2011 तक काशी के लगभग हर घाट के आसपास डॉल्फिन देखी जाती थीं, लेकिन अब सामनेघाट से नमो घाट तक इनका अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है।
विशेषज्ञों के अनुसार गंगा में बढ़ते प्रदूषण और मोटर बोट के अत्यधिक संचालन ने डॉल्फिन के प्राकृतिक आवास को प्रभावित किया है। यही वजह है कि इनका दायरा सिमटकर अब नारायणपुर कैनाल और कैथी के आसपास लगभग एक किलोमीटर के क्षेत्र तक सीमित रह गया है।
वर्तमान में नारायणपुर कैनाल, मिल्कीपुर, बहादुरपुर, कुंडाकला और कुंडा खुर्द के पास ही डॉल्फिन के दर्शन हो पा रहे हैं। डॉल्फिन संरक्षकों का कहना है कि गंदगी और भोजन की कमी के चलते इन जीवों ने अपना ठिकाना बदल लिया है। केंद्र सरकार द्वारा डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किए जाने और वर्ष 2020 में प्रोजेक्ट डॉल्फिन शुरू होने के बावजूद अपेक्षित संरक्षण नहीं मिल पा रहा है।
गौरतलब है कि भारत सरकार ने 5 अक्तूबर 2009 को गंगा डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव का दर्जा दिया था। इसके बाद अक्तूबर 2023 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे उत्तर प्रदेश का राज्य जलीय जीव घोषित किया। इसके संरक्षण की जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपी गई है।
काशी में डॉल्फिन की संख्या अब 100 से भी कम रह गई है। डॉल्फिन संरक्षक नागेंद्र निषाद के अनुसार कैथी क्षेत्र में करीब 50 और नारायणपुर कैनाल के पास लगभग 12 डॉल्फिन ही बची हैं। पहले गंगा में इनकी संख्या काफी अधिक थी, लेकिन प्रदूषण और पर्याप्त आहार न मिलने से इनका पलायन हुआ है।
डॉल्फिन एक बुद्धिमान, सामाजिक और चंचल स्तनधारी जीव हैं, जो सांस लेने के लिए सतह पर आती हैं और ध्वनि तरंगों के माध्यम से दिशा व शिकार का पता लगाती हैं। गंगा में मोटर बोट के कारण उत्पन्न कंपन इनकी इकोलोकेशन प्रणाली को प्रभावित करता है, जिससे ये भयभीत होकर शांत क्षेत्रों की ओर चली जाती हैं।
डॉल्फिन संरक्षक दर्शन निषाद का कहना है कि गंगा में बढ़ता प्रदूषण और मोटर बोट की संख्या इनके अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा है। इनके संरक्षण के लिए स्वच्छ जल और शांत वातावरण अनिवार्य है, जिसके लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे।
वहीं, प्रभागीय वनाधिकारी स्वाती श्रीवास्तव ने बताया कि प्रोजेक्ट डॉल्फिन के तहत संरक्षण कार्य जारी है। कैथी और नारायणपुर क्षेत्र में इनकी मौजूदगी बनी हुई है और इनके संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही विशेष अभियान भी चलाया जाएगा।
