वाराणसी
कैंट रेलवे स्टेशन के सामने स्मार्ट सिटी की दुकानों में हाइजीन की उड़ रहीं धज्जियाँ
वाराणसी। कल्पना कीजिए कि आप किसी रेस्टोरेंट या ढाबे पर खाने बैठे हों अचानक धूल का ग़ुबार उठे और प्लेट धूल से पट जाय।आप ऐसे किसी भी जगह खाना पसंद नहीं करेंगे।परंतु शहर में एक ऐसा स्थान है जहां न चाहते हुए भी पेट की आग बुझाने जाना पड़ता है। यह स्थान है कैंट रेलवे स्टेशन के ठीक सामने फ़्लाइओवर के नीचे जहां खाने पीने के दर्जनों खोखे आबाद है। इन्हें बसाया है स्मार्ट सिटी ने जिसका नियंत्रण नगर निगम के हाथों में है।

जैसा कि मालूम है, पेट से संबंधित ज़्यादातर बीमारियों का संबंध दूषित भोजन और पेयजल से होता है। यह सर्वविदित तथ्य है। लेकिन इस तथ्य से या तो स्मार्ट सिटी अनजान है या नागरिकों के स्वास्थ्य से ज़्यादा उसे सरकारी धन को खपाने में ज़्यादा रुचि है। अगर ऐसा न होता तो सारे नियम क़ानून को ताक पर रख कर कैंट स्टेशन के सामने फ़्लाइओवर के नीचे ढ़ेर सारे खोखे न आवंटित किए होते। इन खोखों में चावल दाल से लेकर पिज़्ज़ा, छोले भटूरे, बाटी चोखा और भी न जाने क्या क्या बिकता है ? लेकिन यहाँ खाने की एक शर्त है कि व्यंजनों के साथ ही सड़क पर उड़ती धूल और कंकड़ भी खाना होगा। इसमें इन बेचारे दुकानदारों का कोई दोष नहीं है।क्योंकि फ़्लाइओवर की दोनों तरफ़ ट्रैफ़िक इतनी है कि धूल और गर्द के ग़ुबार को कत्तई रोका नहीं जा सकता।

स्मार्ट सिटी ने जब फ़्लाइओवर के नीचे दुकाने बनाने की योजना बनायी तो कहा गया कि, यह इंदौर के नाईट बाज़ार की तर्ज़ पर होगा जहां शहर की पब्लिक शाम को तफ़रीह करने कैंट स्टेशन जाएगी और इन खोखों के स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ़ उठाएगी।
स्मार्ट सिटी को शायद मालूम नहीं की इंदौर का नाईट बाज़ार जौहरी मार्केट में बाज़ार बंद होने के बाद पटरियों पर लगता है। दोनों तरफ़ पुलिस का पहरा रहता है। मार्केट में वाहन नहीं जा सकते। सिर्फ़ पैदल चलने की अनुमति है। इंदौर की नाईट मार्केट रात 8 बजे से 2 बजे तक चलती है। इसके बाद सफ़ाई अभियान शुरू होता है।जौहरी मार्केट की दुकानें खुलने से पहले वहाँ कूड़े का नामोनिशान नहीं मिलता। दशकों से यह सिलसिला सफलतापूर्वक चला आ रहा है। इस नाईट बाज़ार में इतनी भीड़ होती है कि चलने की जगह नहीं मिलती।

बनारस के स्मार्ट सिटी के हुक्मरानों को अगर नाईट मार्केट बनाना ही था तो किसी खुले स्थान या मैदान में बनाना था। कुछ नहीं सूझा तो कैंट के अति भीड़-भाड़ वाले इलाक़े में गुमटी मार्केट खोल दी। नाम दिया नाईट बाज़ार जो दिन भर खुला रहता है। पास में ही रोडवेज़ है जिसकी बसों की दिन भर आवाजाही लगी रहती है। ऐसे में इस तथाकथित नाईट मार्केट में जाना मतलब मौत को दावत देना है। फ़्लाइओवर के दोनों तरफ़ टेम्पो , टोटो का जमावड़ा। इसी अफ़रा-तफ़री में ट्रेन पकड़ने की जद्दोजहद और बीच में सिरदर्द नाईट मार्केट।
केंद्र और राज्य सरकार की ईमानदारी और नीयत पर शक नहीं किया जा सकता है। बनारस को जब स्मार्ट बनाने के लिए स्मार्ट सिटी का दफ़्तर खुला तो लगा कि शहर का कायाकल्प हो जायेगा। शहर का शुमार दुबई, हांगकांग जैसे अत्याधुनिक शहरों में होने लगेगा। लेकिन स्मार्ट कौन कहे पहले से भी बदतर हालात हो गये। कैंट स्टेशन का इलाक़ा जो पहले से ही जाम से जकड़ा था अब फ़्लाइओवर के नीचे दुकानें बनाने से और भी बदतर हो गया है। सड़क पार करना भी अब मुश्किल है।
