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गोरखपुर

कृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग से गूंजा बैजलपुर, कथा श्रवण सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

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गोरखपुर। सहजनवां ब्लाक की ग्राम पंचायत बैजलपुर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा अमृत महोत्सव के छठवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण और विस्तृत वर्णन किया गया। कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए।

कथा व्यास आचार्य पंडित ललित मिश्रा जी महाराज ने अपने श्रीमुख से कंस वध, जरासंध युद्ध तथा श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की कथा सुनाते समय वातावरण भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालु स्वयं को बराती मानकर भक्ति भाव से झूमते दिखाई दिए।

आचार्य श्री ने कहा कि युवावस्था प्राप्त करने के पश्चात भगवान श्रीकृष्ण मथुरा पहुंचे, जहां उन्होंने अत्याचारी मामा कंस का वध कर कारागार में बंद अपने माता-पिता देवकी और वासुदेव को मुक्त कराया। कंस के वध से क्रोधित उसके ससुर मगध नरेश जरासंध ने मथुरा पर सत्रह बार आक्रमण किया, किंतु प्रत्येक बार श्रीकृष्ण और बलराम ने उसे पराजित कर जीवनदान दिया। बलराम जी के प्रश्न करने पर भगवान श्रीकृष्ण ने स्पष्ट किया कि जरासंध अधर्मी राजाओं को साथ लेकर युद्ध करता है, जिससे एक साथ अधर्मियों का नाश संभव हो सके। अठारहवीं बार के आक्रमण के बाद भगवान श्रीकृष्ण मथुरावासियों को सुरक्षित द्वारिका ले जाकर बसाए।

कथा के दौरान गुरुकुल गमन, कालिय नाग दमन सहित अन्य दिव्य लीलाओं का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया। रानी रुक्मिणी को माता लक्ष्मी का अवतार बताते हुए विवाह प्रसंग का अत्यंत मनोहारी चित्रण प्रस्तुत किया गया।

इस अवसर पर मुख्य यजमान लाल साहब यादव, यशपाल सिंह रावत पूर्व विधायक सहजनवा, राकेश यादव, रामकेश यादव, डा० जवाहर यादव, सिंटू मिश्रा, अजीत यादव, धर्मेन्द्र यादव, सुनील विश्कर्मा, जैन यादव, अवधेश यादव, जयप्रकाश, धीरज, संतोष सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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