गाजीपुर
कांशीराम आवास कॉलोनी का निर्माण वर्षों से अधर में, बढ़ी संदिग्ध गतिविधियां
सादात (गाजीपुर) जयदेश। ससना ग्राम पंचायत के पास नहर के किनारे नगर पंचायत की जमीन पर निर्माणधीन कांशीराम आवास कालोनी का निर्माण कार्य पिछले कई वर्षों से अधर में लटका हुआ है। इसे पूर्ण कर हैण्ड ओवर नहीं किया गया है। जो भाग बना है वह भी जर्जर होकर टूट रहा है। इसमें किसी भी लाभार्थी को आवंटन नहीं हुआ है। कालोनी के लिए साढ़े पांच बीघा जमीन में ढाई सौ आवास का निर्माण होना था। लेकिन आधा दर्जन से अधिक आवास बनने के बाद इसका कार्य लगभग बंद हो गया है।

नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन राजनाथ यादव ने बताया कि इस कालोनी के निर्माण का कार्य बसपा सरकार में शुरू हुआ था। इसके लिए करोड़ का बजट आवंटित किया गया था। लेकिन बसपा सरकार के जाने के बाद इसका निर्माण कार्य मंद पड़ गया और आगे चलकर ठप्प हो गया। इस कालोनी में जो आवास बने हैं वह इस समय चोर , बदमाश, जुआरियों, रंगरेलियां मनाने वालों का अड्डा बन गए है। इसके अंदर और बाहर इतना घांस-फूस उग आई है कि इसमें जंगल जैसी स्थिति बन गई है। बने आवास जर्जर हो गए है। दरवाजे , रोशनदान और खिड़कियां चोर उखाड़ ले गए हैं। कोई रखवाली करने वाला नहीं है। नहर के किनारे सुनसान जगह पर बनी इस अधूरी कालोनी की हालत सुरक्षा की दृष्टि से असुरक्षित है।

उन्होंने बताया कि नगर पंचायत द्वारा ग्राम पंचायत ससना से यह साढ़े पांच बीघा जमीन कालोनी बनाने के लिए के लिए ली गई थी, जो नगर पंचायत सादात के नाम से दर्ज है ।इस अधूरी कालोनी में जो आवास बना है उसमें कोई रहता नहीं है।
उन्होंने बताया कि कांशीराम आवास योजना शहरी गरीबों के लिए आवास योजना है ।इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, निराश्रित विधवाओं और विकलांगों को रियायती दरों पर पक्के मकान उपलब्ध कराना है। जिसमें अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान है। इस योजना के तहत बने मकानों का आवंटन प्राथमिकता के आधार पर होता है। लाभार्थी गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले होने चाहिए। कुल भवनों में 50 प्रतिशत अनुसूचित जाति और जनजाति तथा 27 प्रतिशत पिछले वर्ग के लिए आरक्षित हैं।
