वाराणसी
कबीरदास जयंती पर विभिन्न राज्यों के संतों और अनुयायियों ने लिया भाग, पुस्तक का हुआ विमोचन
विशाल भंडारे में हजारों लोगों ने किया प्रसाद ग्रहण


वाराणसी। 22 जून को कबीर दास जयंती पर कबीर प्राकट्य स्थली लहरतारा में महंत गोविंद दास शास्त्री के देख-रेख में देश के अलग-अलग प्रदेशों से आए हुए संतो द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमें भजन, कीर्तन, संगोष्ठी, किताब वैशाली: ‘एक अनंत यात्रा का विमोचन’ और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

इस अवसर पर वाराणसी और बाहर से आये गणमान्य संतो और अनुयायियों ने भाग लिया। इसमें कबीर प्रकट स्थल पर महर्षि भगवान वाल्मीकि आश्रम नई दिल्ली से आए महंत विवेक नाथ महाराज मुख्य अतिथि के रूप में अपना भजन और संवाद किया।

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय। माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय॥ (अर्थ- कबीर दास जी कहते हैं कि धैर्य रखें धीरे-धीरे सब काम पूरे हो जाते हैं, क्योंकि अगर कोई माली किसी पेड़ को सौ घड़े पानी से सींचने लगे तब भी फल तो ऋतु आने पर ही लगेगा।)

ऐसे वाणी से लोगों को संदेश उन्ही के भाषा में बताने का काम किया। इस अवसर पर एक पुस्तक वैशाली एक अनंत यात्रा का विमोचन किया गया जो कि हमारी संस्कृति के प्रतीक विभिन्न स्थलों के बारे में विस्तृत जानकारी है। इस पुस्तक को डॉ मनोज कुमार सिंह द्वारा संपादन किया गया है जिसका प्रमुख उद्देश्य हमारे संस्कृति को बचाए रखने के लिए इन धरोहरों के बारे में अपने आने वाले पीढ़ी को बताने का प्रयास किया गया है।

इस अवसर पर आए हुए जगह-जगह के संतों ने अपना विचार व्यक्त किया। हर साल ज्येष्ठ माह में पूर्णिमा तिथि को संत कबीरदास की जयंती मनाई जाती है। संत कबीरदास भक्तिकाल के प्रमुख कवि थे। कबीरदास न सिर्फ एक संत थे, बल्कि वे एक विचारक और समाज सुधारक भी थे। उन्होंने अपने पूरे जीवन में समाज की बुराइयों को दूर करने के लिए कई दोहे और कविताओं की रचना की। कबीरदास हिंदी साहित्य के ऐसे कवि थे, जिन्होंने समाज में फैले आडंबरों को अपनी लेखनी के जरिए उस पर कुठाराघात किया था। संत कबीरदास ने आजीवन समाज में फैली बुराइयों और अंधविश्वास की निंदा करते रहे।

साईं इतना दीजिए, जा मे कुटुम समाय। मैं भी भूखा न रहूं, साधु ना भूखा जाय।।
कबीरदास ने अपने दोहों के माध्यम से जीवन जीने की कई सीख दी हैं। आज भी लोग इनके दोहे गुनगुनाते हैं।
कार्यक्रम में विधायक सौरभ श्रीवास्तव, डॉ. संजय गुप्ता, वृंदावन से महंत रामदास महाराज, रामजानकी मंदिर के महंत अवध बिहारी महाराज, बीएचयू डॉ राजीव अमरीश सिंह भोला, दिनेश दास महाराज, दर्शन दास कोटा राजस्थान से आदि प्रमुख रूप से थे। अमित श्रीवास्तव का कबीर वाणी पर अभिनय जुलूस प्रभात का भी आयोजन किया गया।
