गोरखपुर
एम्स गोरखपुर में घुटना एवं कूल्हा रोबोटिक सर्जरी पर सीएमई का हुआ आयोजन
गोरखपुर। एम्स गोरखपुर के ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग द्वारा “घुटना एवं कूल्हा रोबोटिक सर्जरी” विषय पर एक सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम का आयोजन सेमिनार हॉल में किया गया। इस शैक्षणिक कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों, रेजिडेंट डॉक्टरों एवं मेडिकल छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन संस्थान के कार्यकारी निदेशक (Executive Director) द्वारा किया गया। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में उन्नत तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया तथा रोगी देखभाल की गुणवत्ता में सुधार के लिए रोबोटिक सर्जरी जैसे नवाचारों की भूमिका को रेखांकित किया।
इस सीएमई के आयोजन अध्यक्ष (Organising Chairperson) डॉ. अरुण पांडेय, फैकल्टी इंचार्ज, ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग रहे, जबकि आयोजन सचिव (Organising Secretary) की भूमिका डॉ. अनिल मीणा, सहायक प्राध्यापक, ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग ने निभाई। कार्यक्रम का सफल संचालन सीनियर नर्सिंग ऑफिसर (SNO) सुजानी द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया के प्रतिष्ठित संकाय सदस्य एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विशेषज्ञ प्रो. रॉस क्रॉफर्ड का मुख्य व्याख्यान रहा। उन्होंने घुटना एवं कूल्हा प्रत्यारोपण में रोबोटिक सर्जरी की आधुनिक तकनीकों, उनके विकास तथा व्यावहारिक उपयोग पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रो. क्रॉफर्ड ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी से इम्प्लांट की सटीक पोजिशनिंग, बेहतर एलाइनमेंट और सॉफ्ट टिशू बैलेंसिंग संभव होती है, जो पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में बेहतर एवं दीर्घकालिक परिणाम प्रदान करती है। उन्होंने यह भी बताया कि रोबोटिक तकनीक में मरीज की व्यक्तिगत शारीरिक संरचना के अनुसार पूर्व-ऑपरेटिव योजना बनाई जाती है और सर्जरी के दौरान रियल-टाइम फीडबैक प्राप्त होता है, जिससे सर्जिकल त्रुटियों की संभावना कम हो जाती है।
उन्होंने पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में रोबोटिक घुटना एवं कूल्हा सर्जरी के प्रमुख लाभ बताए, जिनमें कम रक्तस्राव, कम दर्द, आसपास के ऊतकों को कम क्षति, शीघ्र रिकवरी, जल्दी चलना-फिरना तथा इम्प्लांट की अधिक आयु शामिल है।
कार्यक्रम में विभाग के संकाय सदस्यों डॉ. अरविंद कुमार, सहायक प्राध्यापक, डॉ. अनिल मीणा, डॉ. श्रीशा, सहायक प्राध्यापक, तथा डॉ. सुहास मॉल (ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन) की सक्रिय उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन (Vote of Thanks) डॉ. श्रीशा, सहायक प्राध्यापक, ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने मुख्य वक्ता, अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
यह सीएमई कार्यक्रम अत्यंत सफल एवं ज्ञानवर्धक रहा और उन्नत, तकनीक-आधारित तथा रोगी-केंद्रित चिकित्सा सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एम्स गोरखपुर की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
