गोरखपुर
आर्थिक आधार पर लागू हो आरक्षण, जातिगत भेदभाव समाप्त करे सरकार: कौशल पांडेय
गोरखपुर। सरकार को देश में व्याप्त जातिगत भेदभाव को समाप्त करते हुए आरक्षण की व्यवस्था में व्यापक सुधार करना चाहिए और इसे आर्थिक आधार पर लागू करना चाहिए, ताकि वास्तव में जरूरतमंद लोगों को इसका लाभ मिल सके। वर्तमान आरक्षण प्रणाली समाज में समानता के बजाय वैमनस्यता को बढ़ावा दे रही है। यूजीसी के आरक्षण नियमों में किए गए हालिया बदलाव आम जनमानस में असंतोष उत्पन्न कर रहे हैं और इससे सामाजिक समरसता प्रभावित हो रही है।
उक्त बातें कौशल पांडेय, राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय अवाम एकता पार्टी, ने गोरखपुर में एक स्थानीय होटल में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार “सबका साथ, सबका विकास” का नारा देती है, वहीं दूसरी ओर आरक्षण से जुड़े नियमों में ऐसे बदलाव किए जा रहे हैं, जो समाज को जातियों में बांटने का काम कर रहे हैं।
कौशल पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू आरक्षण नियमों से योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हो रहा है। इससे प्रतिभा का हनन हो रहा है और देश की शैक्षणिक गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के वर्तमान नियम सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने के बजाय समाज में विभाजन की रेखा खींच रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जब देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति स्वयं आरक्षित वर्गों—जैसे ओबीसी एवं अनुसूचित जनजाति—से आते हैं, तब यह स्पष्ट है कि देश में अवसरों की कमी नहीं है। ऐसे में जाति के आधार पर आरक्षण को लगातार बढ़ाते जाना देशहित में नहीं होगा। इससे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच अविश्वास की भावना पैदा हो रही है और देश कई हिस्सों में बंटने की आशंका बढ़ रही है।
कौशल पांडेय ने सरकार से मांग की कि एससी/एसटी एक्ट की वर्तमान व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए और जातिगत आरक्षण को समाप्त कर आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति चाहे किसी भी जाति या वर्ग से हो, उसे समान अवसर मिलना चाहिए। इससे सामाजिक न्याय भी सुनिश्चित होगा और देश की एकता एवं अखंडता भी मजबूत होगी।
प्रेस वार्ता के अंत में उन्होंने कहा कि भारतीय अवाम एकता पार्टी देश में समानता, भाईचारा और सामाजिक समरसता के लिए संघर्ष करती रहेगी और इस मुद्दे को लेकर जन आंदोलन भी किया जाएगा, ताकि सरकार तक आम जनता की आवाज पहुंच सके।
