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वाराणसी

आयुष निदेशालय ने मांगा आयुर्वेदिक अस्पतालों में दवाओं की कमी का डेटा

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वाराणसी। प्रदेश के आयुर्वेदिक अस्पतालों में महीनों से चली आ रही दवाओं की किल्लत को देखते हुए उत्तर प्रदेश आयुष निदेशालय ने सभी राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों से दवाओं की कमी से जुड़ा विस्तृत ब्योरा मांगा है। मरीजों को बिना बाधा उपचार मिल सके, इसके लिए निदेशालय ने सभी अस्पतालों को तत्काल डेटा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

काशी की प्राचीन आयुर्वेदिक परंपरा और सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी को लेकर उठे मुद्दे पर शासन ने गंभीरता दिखाई है। निदेशालय ने वाराणसी मंडल के सभी 85 आयुर्वेदिक अस्पतालों से स्टॉक, खपत और कमी की सूची गूगल शीट के माध्यम से भेजने को कहा है। इस्टीमेट तैयार होते ही आवश्यक औषधियों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी, जिसके बाद एक रुपये के पर्चे पर मुफ्त दवाएं फिर उपलब्ध होने लगेंगी।

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आयुर्वेदिक एवं यूनानी कार्यालय में दवाओं का स्टॉक खत्म होने और आयुर्वेदिक केंद्रों में दवाओं के संकट पर खबरें प्रकाशित हुई थीं। जबकि मानक के अनुसार अस्पतालों में 210 से अधिक प्रकार की दवाएं उपलब्ध रहनी चाहिए, वहीं महीनों से सिर्फ 7 से 30 दवाओं के सहारे काम चल रहा था। योगराज गुग्गुल, अश्वगंधा चूर्ण, दशमूलारिष्ट और सितोपलादि चूर्ण जैसी प्रमुख दवाएं उपलब्ध न होने से सैकड़ों ग्रामीण, बुजुर्ग और गरीब मरीज खाली हाथ लौट रहे थे।

कोरोना के बाद आइएमपीसीएल से अनियमित दवा सप्लाई और लखनऊ निदेशालय से विलंबित आपूर्ति ने स्थिति को और खराब किया। अब निदेशालय ने सभी अस्पतालों से दवाओं की उपलब्धता, खपत और कमी का डेटा त्वरित रूप से जुटाने की प्रक्रिया शुरू करा दी है।

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