वाराणसी
आयुर्वेद के नाम पर घातक स्टेरॉयड की मिलावट : विष्णु अग्रवाल
उत्तर प्रदेश आयुष निदेशालय के उच्चाधिकारियों की मिलीभगत
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 नवंबर 2014 को आयुर्वेद के सर्वांगीण विकास की महत्ता को पूरे विश्व में स्थापित करने के उद्देश्य से आयुष मंत्रालय का गठन किया था। लेकिन प्रदेश का आयुष निदेशालय ही इस महत्वाकांक्षी योजना पर पानी फेरने पर तुला हुआ है।
आयुर्वेद के नाम पर ऐसे स्टेरॉयड मिली औषधियों को बेचा जा रहा है, जिससे लाखों करोड़ों युवा और वृद्ध किडनी, लीवर और हृदय रोगों से पीड़ित हो रहे हैं। घुटने की दर्द की आयुर्वेदिक दवा में भी स्टेरॉयड की भी मिलावट की जा रही है। इसके अलावा जिम करने वाले लड़के जो पाउडर लेते हैं उसमें भी स्टेरॉयड मिला होता है। यदि वह इस पाउडर का सेवन करना बंद कर देते हैं तो उनका वजन कम होने लगता है। इस गोरखधंधे को आयुष निदेशालय के अधिकारियों का खुलेआम संरक्षण मिल रहा है।

शहर के प्रमुख समाजसेवी विष्णु अग्रवाल ने शुक्रवार को पराड़कर स्मृति भवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान आरोप लगाते हुए कहा कि, उक्त काले कारोबार में आयुष निदेशालय के उच्चाधिकारियों की पूरी मिलीभगत है। जिसके स्पष्ट प्रमाण भी मिले हैं। कुछ जिलों में क्षेत्रीय आयुष अधिकारियों के उठाए गए दवाईयों के सैंपल की सरकारी लैब में हुई जांच से जो रिपोर्ट सामने आई है इसमें स्टेरॉयड मिली हुई है। जिन कंपनियों के सैंपल में स्टेरॉयड पाया गया, उन सभी कंपनियों के विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई करने के बजाय सिर्फ चंद लोगों के खिलाफ आधी अधूरी कार्रवाई की गई और बाकी लोगों को संरक्षण देकर बचाया जा रहा है।

आयुष निदेशालय के भ्रष्टाचार का आलम यह है कि फार्मेसियों को नए फार्मूले की अनुमति देने के नाम पर 4000 रुपये प्रति योग की वसूली की जा रही है। फार्मेसी को लाइसेंस देने के लिए आयुष निदेशालय द्वारा भी मोटी रकम वसूल की जा रही है। विष्णु अग्रवाल ने मांग कि- आयुष निदेशालय के क्रियाकलापों की जांच के लिए तत्काल एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित हो तथा स्टेरॉयड का व्यापार करने वाली कंपनियों के हजारों करोड़ों रुपए की काली कमाई की गहराई से जांच कराई जाए।
