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पूर्वांचल

अच्छे विचार से राष्ट्र का निर्माण होता है और गलत विचार राष्ट्र के लिए घातक : डॉ.दीप पटेल

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चंदौली। 24 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण प्रवचन के प्रथम दिन शांतिकुंज हरिद्वार से आए कथावाचक डॉ.दीप पटेल ने कहा कि, विचार यदि नेक होते है तो सारे कार्य अनुकूल होते है और यदि विचार विपरित हो तो वे विनाश की तरफ जाते है। उन्होंने इसे माता कैकई के प्रसंग का उदाहरण दिया।

उन्होंने बताया कि, एक बार देवाशुर संग्राम में भगवान इंद्र की तरफ से अयोध्या के राजा दशरथ से असुरों से युद्ध कर रहे थें साथ में महारानी ककैयी भी थी। इस महा संग्राम में राजा दशरथ का रथ का पहिया क्षतिग्रत हो गया तभी महारानी कैकयी ने बहादुरी का परिचय देते हुई अपने हाथ से रथ के पहिए को जोर से पकड़ कर मजबूती दी और राजा दशरथ के जान को ही नहीं बचाया बल्कि उस युद्ध में विजय भी दिलवाई। धर्म की विजय हुई उसी समय राजा दशरथ ने महारानी कैकई से दो वरदान मांगने को कहा तो रानी ने कहा कि, महाराज आप की जान बच गई और मैं विधवा होने से बच गई एक वरदान तो इस तरह मिल गया। आप इस युद्ध में विजयी हुए ये मुझे दूसरा वरदान मिल गया अब किसी चीज को इच्छा नहीं है।

लेकिन लगातार जिद करने पर महारानी कैकई ने यह कहा कि, महाराज आप की इच्छा वरदान देने की ही है तो समय आने पर मागूंगी। ये विचार श्रेष्ठ और सकारात्मक थें जिसे न केवल युद्ध में विजय मिला और राजा की कृति चारों तरफ फैली।

समय धीरे-धीरे परिवर्तित हुआ भगवान श्री राम की राजगद्दी की घोषणा महाराज दशरथ ने कर दी। उस समय भी एक विचार सबके सामने आया। भगवान श्री राम ने देवताओं से कहा‌ कि, मेरा जन्म राजगद्दी के लिए नहीं हुआ यदि ऐसा होता है तो मेरा जीवन निरूत्तर हो जाएगा। ऐसी बात सुनकर देवताओं ने मंत्रणा कया और इसी मंत्रणा को लेकर मां सरस्वती के पास गए पहले माता ने साफ-साफ मना कर दिया लेकिन मानव जाति के हित को देखते हुए एक कुविचार महारानी कैकई की दासी मंथरा को दे दिया। इस विचार के तहत भगवान श्री राम को 14 वर्ष का वनवास हुआ। राजा दशरथ की मृत्यु भी हो गई।ऐसे विचार राष्ट्र के हित में नहीं प्रज्ञा पुराण कथा का मूलस्रोत लोगों के बीच अच्छे विचार का प्रसार होना ही होता है। कथा समाप्ति के उपरांत भंडारे में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।

इस अवसर पर सुभाष नगर की सभासद सहित सोम देव पटैया,पवन कुमार अर्पित पांडेय,उदय नारायण उपाध्याय, प्रदीप सक्सेना संपूर्णानंद तवारी, लक्ष्मीकांत पांडेय,, राजेंद्र श्रीवास्तव एसपी गुप्ता देव दत्त, जहां नाथ, उज्जवल स्वरूप, श्रीवास्तव, दिलीप पांडे, मालती,रीता, संगीता, रमिता यादव आदि लोग उपस्थित थे।

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