वाराणसी
Varanasi: काशी की गलियों में गूंजा “सुभाष न होते, तो हम आजाद न होते”
आजाद हिन्द सरकार के स्थापना दिवस के अवसर पर भारतीय अवाम पार्टी ने निकाला सुभाष मार्च
● सुभाष मन्दिर से सुभाष पार्क तक निकला मार्च।
● नेताजी सुभाष की सरकार ने अंग्रेजों को एशिया से भागने के लिए मजबूर कर दिया।
● आजाद हिन्द सरकार ने अखण्ड भारत की लड़ाई लड़ी, लेकिन कांग्रेस ने देश बाँट दिया।
● अखण्ड भारत का सपना सुभाषवादी पूरा करेंगे।
Varanasi। 21 अक्टूबर 1943 को सम्पूर्ण भारत की आजादी के लिए परम पावन नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिन्द सरकार की स्थापना की। आजाद हिन्द सरकार को 10 देशों ने मान्यता दे दी। अंग्रेजों के अत्यचारों का जवाब देने और कांग्रेस के ढुलमुल रवैये से त्रस्त भारतीय जनमानस को आजादी दिलाने के लिए नेताजी सुभाष ने 22-23 अक्टूबर 1943 की अर्ध रात्रि को ब्रिटेन के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर द्वितीय विश्व युद्ध की पूरी परिस्थिति बदल दी। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर नेताजी की फौज ने अंग्रेजों को घेर लिया। अंग्रेजों के प्रति निष्ठा रखने वाले कांग्रेसी नहीं चाहते थे कि नेताजी सुभाष की फौज भारत में प्रवेश करे, तभी तो नेहरू ने कहा था कि अगर आजाद हिन्द फौज भारत में प्रवेश की तो मैं तलवार लेकर उसका मुकाबला करूंगा। बावजूद इसके नागालैंड के कुछ जिलों में, अंडमान पर नेताजी ने तिरंगा लहराकर अंग्रेजों से मुक्त क्षेत्र घोषित कर दिया।
आजाद हिन्द सरकार में जिन पदाधिकारियों की नियुक्ति हुई उनके नाम पद इस तरह से है –
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस – राज्याध्यक्ष, प्रधानमंत्री, युद्ध एवं विदेश मंत्री।
कैप्टेन लक्ष्मी सहगल – महिला विभाग।
एस०ए० अय्यर – प्रचार एवं प्रसारण।
लेफ्टिनेंट कर्नल ए०सी० चटर्जी – वित्त
ले० कर्नल अजीज अहमद, ले० कर्नल एन एस भगत, ले० कर्नल जे के भोसले, ले० कर्नल गुलजार सिंह, ले० कर्नल एम जेड कियानी, ले० कर्नल ए डी लोगनाथन, ले० कर्नल एहसान कादिर, ले० कर्नल शाहनवाज सशत्र सेना के प्रतिनिधि बनाये गए। रासबिहारी बोस उच्चतम परामर्शदाता, कबीर गनी, देवनाथ दास, डीएम खान, ए चलप्पा, जे थिवी, सरदार इदार सिंह परामर्शदाता बनाये गए। ए एन सरकार कानूनी सलाहकार बने।
आजाद हिन्द सरकार के स्थापना दिवस के अवसर पर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के महान आदर्शों पर चलने वाली भारतीय अवाम पार्टी ने लमही के सुभाष मन्दिर से सिगरा के सुभाष पार्क तक सुभाष मार्च निकाला। दो पहिया वाहनों पर सवार भारतीय अवाम पार्टी के नेताओं ने तिरंगे झंडे और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की तस्वीर के साथ नारा लगाया “सुभाष न होते, तो हम आजाद न होते।“ भारत माता की जय और वंदेमातरम् के गगनभेदी नारों से वातावरण गूंजता रहा। पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष नजमा परवीन के नेतृत्व में निकले सुभाष मार्च ने आजाद हिन्द फौज की याद दिला दी।
लमही के सुभाष मन्दिर में राष्ट्रदेवता के रूप में स्थापित परम् पावन नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के दर्शन पूजन कर भारतीय अवाम पार्टी के नेताओं ने सुभाष मार्च प्रारम्भ किया। मार्च सिगरा के सुभाष पार्क मं् पहुंचकर सभा में तब्दील हो गया। पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष नजमा परवीन एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ज्ञानप्रकाश ने नेताजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। सभा की शुरुवात करते हुए जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश पाण्डेय ने प्रस्ताव रखा कि हर गांव में सुभाष चौक स्थापित किया जाय।
राष्ट्रीय अध्यक्ष नजमा परवीन ने कहा कि देश को आजादी आजाद हिन्द सरकार ने दिलाई है। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ही देश के पहले प्रधानमंत्री हैं। इतने सालों से नेहरू खानदान ने देश को गलत इतिहास पढाया है। भारतीय अवाम पार्टी की सरकार बनते ही 24 घण्टे के अंदर इतिहास को करेक्ट कर दिया जाएगा। आजादी के महान वीरों और आजाद हिन्द फौज के सिपाहियों के इतिहास को खत्म करने का गुनाह कांग्रेस ने किया है। देश को बांटने वाली पार्टी कांग्रेस है, इसको कभी क्षमा नहीं किया जा सकता। आजादी में भाग लेने वाले मुसलमानों का इतिहास खत्म कर कांग्रेस ने मुसलमानों को अपने ही घर में बेगाना बना दिया। सम्पूर्ण भारत की स्थापना ही पार्टी का मकसद है।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ज्ञानप्रकाश ने कहा कि आजाद हिन्द सरकार बिना किसी भेदभाव की थी। इसमें दलित वीरों को भी मौका मिला था और देश की पहली महिला सेना भी थी। कांग्रेस और वामपंथियों ने दलित वीरों का इतिहास छुपा दिया। फिर से फाइल खुलेगी और देश को कांग्रेस का कलंक पता चलेगा।
प्रदेश महासचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि जिन गांवों से आजाद हिन्द फौजियों का सम्बन्ध रहा है उन गांवों या स्थानों पर आजाद हिन्द स्मृति स्तम्भ बनाया जाएगा, ताकि लोग जान सकें कि आजाद हिन्द सरकार की वजह से ही आजादी मिली है। देश के महान क्रांतिकारियों को उनके योगदान के लिए हमेशा याद किया जाएगा।
सुभाष मार्च में प्रदेश महासचिव अनिल पाण्डेय, जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश पाण्डेय, जिला उपाध्यक्ष राजकुमार राजू, सुभाषवादी नेता सूरज चौधरी, पीयूष पाण्डेय, अफरोज खान, फिरोज खान, अब्दुल हलीम, शेरू खान, राजेश कन्नौजिया, पुनीत खोसला, रजत राज, सलीम खाँ, कन्हैया पाण्डेय, राहुल कुमार, मनीष मिश्रा, राजदेव चौबे, देवेन्द्र कुमार, रोहित भारद्वाज, किशन यादव, विशाल मिश्रा, कैलाश यादव, डी०एन० सिंह, राजीव कुमार गिरी, धनंजय यादव आदि लोगों ने भाग लिया।
