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डिप्टी एसपी ‘जिया उल हक’ हत्याकांड में सभी दोषियों को उम्रकैद, सीबीआई कोर्ट ने सुनाया फैसला
प्रतापगढ़। डिप्टी एसपी जिया उल हक की हत्या के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है और प्रत्येक पर 15-15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कुछ दिन पहले अदालत ने आरोपियों को दोषी करार दिया था और सजा के निर्धारण के लिए 9 अक्तूबर की तारीख तय की थी।
बुधवार को अदालत ने सभी 10 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, साथ ही उन पर 19,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माने की आधी राशि डिप्टी एसपी जिया उल हक की पत्नी, परवीन आजाद को देने का निर्देश भी अदालत ने दिया है।

कुंडा के सीओ जिया उल हक हत्याकांड का 11 साल बाद फैसला सुनाया गया। सीबीआई की विशेष अदालत ने दस आरोपियों को दोषी ठहराया। बलीपुर के प्रधान नन्हे यादव की हत्या और उनके भाई की गोली लगने से मौत के बाद गुस्साए लोगों ने सीओ जिया उल हक की लाठी-डंडों से पिटाई की और फिर गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड का आरोप कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और उनके करीबी गुलशन यादव पर भी लगा था, लेकिन सीबीआई ने जांच के दौरान दोनों को क्लीन चिट दे दी थी।

देवरिया जिले के नूनखार टोला जुआफर के निवासी जिया उल हक को 2012 में कुंडा क्षेत्र का सीओ नियुक्त किया गया था। 2 मार्च 2013 को हथिगवां के बलीपुर गांव में प्रधान नन्हे सिंह यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना उस समय हुई थी जब नन्हे यादव विवादित जमीन के पास एक चाय की दुकान पर बैठे थे। इस मामले में सीओ जिया उल हक की हत्या के लिए नन्हे सिंह के बेटे योगेंद्र उर्फ बबलू, भाई पवन, फूलचंद्र, और गार्ड मंजीत को मुख्य आरोपी बनाया गया था।
