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धर्म-कर्म

माँ कात्यायनी ने ही किया था महिषासुर का वध

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नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है। मां कात्यायनी ने महिषासुर का वध किया था और यही कारण है कि उन्हें महिषासुर मर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है। वाराणसी के सिंधिया घाट पर मां कात्यायनी का एक प्रसिद्ध मंदिर स्थित है।

मां कात्यायनी, मां दुर्गा के छठे स्वरूप के रूप में पूजी जाती हैं। उन्होंने यह स्वरूप अपने भक्त ऋषि कात्यायन के लिए धारण किया था। ऋषि कात्यायन मां आदिशक्ति के अटूट भक्त थे और उन्होंने मां भगवती को अपने घर आने के लिए कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माता कात्यायनी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया जिससे उनका नाम कात्यायनी पड़ा।

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माता कात्यायनी की चार भुजाएं हैं जो अस्त्र-शस्त्र और कमल के फूल से सुसज्जित हैं। उनका वाहन सिंह है। मां को पीले पुष्प और पीली वस्तुओं का विशेष रूप से भोग अर्पित करने का विधान है। यहां दर्शन करने से कुंवारी कन्याओं का शीघ्र विवाह होता है। माता की पूजा से भक्तों को सौभाग्य, यश और वैभव की प्राप्ति होती है।

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