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धर्म-कर्म

शिव की नगरी काशी में आज से शुरू होगा शक्ति की आराधना का पर्व

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शारदीय नवरात्रि के दौरान क्या करें और क्या न करें:

महादेव की नगरी काशी में हर एक त्यौहार का अपना अलग महत्व होता है। शिव की नगरी काशी में आज से शक्ति का अनुष्ठान और आराधना का पर्व नवरात्रि शुरू हो रहा है। नवरात्रि के नौ दिनों में माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त माता को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के समय विधिपूर्वक माता दुर्गा की पूजा करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। आश्विन माह में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ होता है। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि का पर्व 3 अक्टूबर 2024, रविवार से आरंभ होगा और 12 अक्टूबर 2024 को संपन्न होगा।

(पहला दिन) – 3 अक्टूबर-  मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है

(दूसरा दिन) -4 अक्टूबर -मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है

(तीसरा दिन) -5 अक्टूबर – मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है

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(चौथा दिन)-6 अक्टूबर-मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है

(पांचवा दिन)-7 अक्टूबर- मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है

(छठां दिन)- 8 अक्टूबर- मां कात्यायनी की पूजा की जाती है

(सातवां दिन) -9 अक्टूबर- मां कालरात्रि की पूजा की जाती है

(आठवां दिन) -10 अक्टूबर- मां महागौरी पूजा की जाती है

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(नौंवा दिन) -11 अक्टूबर- मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है

शारदीय नवरात्रि के दौरान क्या करें और क्या न करें:

शुद्ध शाकाहारी भोजन का सेवन करें।

नवरात्रि में प्याज, लहसुन, शराब, और मांसाहार से दूर रहें।

इन नौ दिनों में विवाद, लड़ाई-झगड़ा, और कलह से बचें।

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बच्चियों और महिलाओं का सम्मान बनाए रखें।

साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

यदि घर में कलश स्थापना की है, तो घर को अकेला न छोड़ें; घर में किसी न किसी सदस्य का रहना आवश्यक है।

नवरात्रि के दौरान नाखून या बाल काटने से बचें।

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कलश स्थापना के लिए पूजा स्थल की दिशा


आश्विन माह की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो जाते है। नवरात्रि के पहले दिन देवी के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व होता है। कलश स्थापना के साथ नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्रि आरंभ हो जाते हैं। कलश स्थापना  में दिशा का विशेष महत्व होता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, देवी दुर्गा की पूजा के लिए ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) सबसे शुभ मानी जाती है। यह दिशा स्वच्छता, पवित्रता और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है। यदि इस दिशा में पूजा की जाती है, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और पूजा का प्रभाव अधिक शक्तिशाली होता है।

नवरात्रि पर क्यों जलाई जाती है अखंड ज्योति ?


नवरात्रि का त्योहार हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखता है। इसमें नौ दिनों तक देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ विधि-विधान पूर्वक माता का स्वागत किया जाता है और अखंड ज्योति जलाई जाती है। अखंड ज्योति दुर्गा के प्रति समर्पण, आस्था और भक्ति का प्रतीक है। अखंड ज्योति का अर्थ है ‘निरंतर जलने वाला दीपक’। इसे देवी की कृपा और आशीर्वाद का स्रोत माना जाता है।

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