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वाराणसी

दीक्षांत समारोह: 16 मेधावियों को राष्ट्रपति ने पहनाया गोल्ड मेडल, उपाधि पाकर खिले स्टूडेंट्स के चेहरे

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वाराणसी। उत्तर प्रदेश के इतिहास में पहली बार राजस्तरीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल हुई। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 45 वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होकर 16 मेधावियों को गोल्ड मेडल पहनाया। राष्ट्रपति ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से उत्तीर्ण हुए सभी छात्र-छात्राओं के उज्जवल भविष्य की कामना की। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह के पश्चात राष्ट्रपति वाराणसी एयरपोर्ट से लखनऊ के लिए रवाना हो गईं।

माता-पिता व गुरुजन को जाता है इस सफलता का श्रेय: आयुषी

दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल पाकर स्टूडेंट्स के चेहरे खिल उठे। राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होकर मेधावी छात्र -छात्राएं काफी खुश नजर आए। गोल्ड मेडल पाने वाली छात्रा आयुषी काफी उत्साहित दिखी। आयुषी ने कहा कि उन्होंने हिंदी पत्रकारिता में गोल्ड मेडल पाया है और राष्ट्रपति के हाथों गोल्ड मेडल पाकर वह काफी गौरवान्वित महसूस कर रही है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता व गुरुजनों को दिया है।

आईएएस बनना है सपना: प्रीतम

छात्रा प्रीतम प्रसाद ने कहा कि उन्हें एमए इतिहास में छात्रा से गोल्ड मेडल प्राप्त हुआ है। इस दौरान उन्हें काफी ख़ुशी महसूस हो रही है। उनका सपना आईएएस ऑफिसर बनने का सपना है। फ़िलहाल वह टीचर के लिए अप्लाई कर रही है। प्रीतम ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया है।

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राष्ट्रपति से मेडल पाकर हूं गर्वान्वित: सिद्धांत

छात्र सिद्धांत सेठ ने कहा कि उन्हें उत्कृष्ट खिलाड़ी के लिए गोल्ड मेडल मिला है। सिद्धांत ने बताया कि उन्हें पहले भी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री सम्मानित कर चुके हैं। इस बार राष्ट्रपति से सम्मानित होकर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उनका आगे का लक्ष्य खेल में अच्छा मुकाम हासिल करना है।

महामहिम का मार्गदर्शन हमारे लिए गर्व की बात: कुलपति

कुलपति आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि काशी विद्यापीठ का 45वां दीक्षांत समारोह काफी विशिष्ट रहा। इस बार महामहिम राष्ट्रपति ने मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया है। हमलोग काफी मन से इसकी प्रतीक्षा में थे। महामहिम ने विद्यापीठ के अतीत और कैसा हो विद्यापीठ इसके बारे में काफी मुखर तरीके से बताई। उनका आना विद्यापीठ के लिए गौरव के साथ साथ मार्गदर्शक भी रहा।

परिसर के कई बच्चों को बाहर गेट पर ही रोका गया था। जिस पर कुलपति ने कहा कि काशी विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में लगभग तीन लाख बच्चे शामिल होते हैं। इसमें एक लाख बच्चों को प्रतिभाग करना होता है। ऐसे में प्रत्येक बच्चों को एक दिन में मेडल देना संभव नहीं है। ऐसे में तय किया गया था कि जो गोल्ड मेडलिस्ट हैं। उन्हें ही उपाधि दी जाय।

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सभी को एक साथ डिग्री देना संभव नहीं

कुलपति ने कहा कि इसके लिए राष्ट्रपति कार्यालय से ही राष्ट्रपति के लिए एक घंटे से भी कम का समय मिला था। इसके लिए यह निर्धारण किया गया कि महामहिम के हाथों बस गोल्ड मेडलिस्टो को ही सम्मानित कराया जाय। बाकी जो बच्चे आज छुट गए उन्हें हम अपने हाथों से मेडल देंगे। सभी बच्चों को एक दिन में मेडल और डिग्री देना संभव नहीं है। राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल के कारण कई बच्चों को भीतर नहीं आने दिया गया। आज राष्ट्रपति के कार्यक्रम में केवल गोल्ड मेडल ही दिए गए। इसके लिए पहले से अख़बारों और सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दे दी गई थी।

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