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धर्म-कर्म

पांडेयपुर में मौजूद हैं देवों के देव पृथ्वीश्वर महादेव

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रिपोर्ट - विक्की मध्यानी

काशी विश्वनाथ के बड़े भाई के रूप में हैं स्थापित

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वाराणसी।धर्म आध्यात्म की नगरी काशी की महिमा निराली है। यह बाबा की नगरी है उस बाबा की जिसे हम शिव भोलेनाथ महादेव समेत कई नामों से जानते हैं। यहॉं उसी शिव को विश्वनाथ के नाम से भी जाना जाता है। इसलिए काशी को देवाधिदेव विश्वनाथ की नगरी कहा जाता है और यह देश विदेश में आस्था श्रद्धा का केंद्र है। वैसे तो काशी में महादेव कई रूप में स्थापित हैं। इस अवियुक्त क्षेत्र काशी में भगवान शिव के गुरु,,भाई,पिता,साले सभी विराजमान हैं।यह सभी स्वरूप के दर्शन, स्पर्शन, स्मरण एवं जलार्पण समस्त दुखों एवं कष्टों से मुक्ति के साथ सुख-समृद्धि एवं उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति निश्चित मानी गई है।यहां काशी के पांडेपुर के खजूरी मकबूल आलम रोड इलाके में मान्यता है कि यहां भगवान शिव के बड़े भाई पृथ्वीश्वर महादेव मौजूद हैं। पंचकोशी मार्ग पर पड़ने वाले इस मंदिर का महात्म्य एवं श्रेष्ठता विशेष है। इस बाबत मंदिर के पुजारी माता प्रसाद मिश्र का कहना है कि पृथ्वीश्वर महादेव की स्थापना हजारों वर्ष पूर्व भगवान राम जी के पूर्वज राजा पृथु ने की थी।भगवान भोलेनाथ ने जब पंचकोशी यात्रा आरंभ की थी तो बाबा पृथ्वीश्वर महादेव का दर्शन कर उन्हें अपना बड़ा भाई माना था। इसका उल्लेख काशी खंड में धर्म सम्राट स्वामी करपात्री महाराज द्वारा किया गया है और इसके अलावा शिव पुराण में भी है।यह मंदिर पंचकोशी परिक्रमा मार्ग पर स्थित है,और मान्यता यह भी है कि राजा रामचंद्र जी द्वारा अश्वमेध यज्ञ के लिए घोड़ा छोड़ा गया।जो उनके पुत्र लव कुश ने कुछ दिन तक यहां बांधे रखा था।मंदिर के प्रांगण में बाबा पृथ्वीश्वर महादेव का अति सुंदर शिवलिंग विद्यमान है।इसके अलावा प्रांगण में राम जानकी मंदिर हनुमान जी मां विंध्यवासिनी मां काली मां शीतला जी के भी प्राण प्रतिष्ठित हैं। सावन माह आठ अगस्त के चतुर्थ सोमवार को श्रावणी सिंगार यहां होगा। सिंगार सेवा के संयोजक मनीष चौबे ने बताया कि बाबा का भव्य हरियाली हिम सिंगार प्रात 9:00 बजे से आरंभ हो गया है। इसके पश्चात अपराहन 1:00 बजे रुद्राभिषेक एवं शाम 5:00 बजे डमरु दल किया जाएगा। इस अवसर पर रात 8:00 बजे सांस्कृतिक के तहत नृत्य नाटिका होंगी।श्रावण मास में बाबा पृथ्वीश्वर महादेव के दर्शन का विशेष महत्व है।यहां आसपास के जिलों के भी श्रद्धालु दर्शन के लिए के लिए आते है।

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