गोरखपुर
एम्स गोरखपुर में विश्व टीबी दिवस पर CME आयोजित, विशेषज्ञों ने साझा की नई जानकारियां
गोरखपुर। एम्स गोरखपुर में विश्व क्षय रोग (टीबी) दिवस के अवसर पर सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पल्मोनरी मेडिसिन विभाग एवं माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. सुबोध पांडेय के स्वागत संबोधन से हुई, जिसमें उन्होंने सीएमई का परिचय देते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. महिमा मित्तल, डीन अकादमिक, ने टीबी से निपटने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण (इंटीग्रेटेड अप्रोच) की आवश्यकता पर जोर दिया।
वैज्ञानिक सत्रों के दौरान, डॉ. प्रदीप खार्या ने भारत में टीबी की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की, डॉ. अतुल रुकाडिकर ने टीबी निदान में नवीन प्रगति पर प्रकाश डाला, डॉ. कनुप्रिया ने पल्मोनरी टीबी की जटिलताओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए, जबकि लेफ्टिनेंट कर्नल शफीन बाबू पी.एस., एसोसिएट प्रोफेसर, आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल), नई दिल्ली, ने दवा-प्रतिरोधी टीबी के प्रबंधन पर व्याख्यान दिया।
विश्व टीबी दिवस पर इस सीएमई के आयोजन के माध्यम से पल्मोनरी मेडिसिन विभाग एवं माइक्रोबायोलॉजी विभाग, एम्स गोरखपुर ने टीबी उन्मूलन के व्यापक जनस्वास्थ्य मिशन में अपनी प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि यद्यपि टीबी अभी भी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, लेकिन समन्वित एवं निरंतर प्रयासों से टीबी-मुक्त भविष्य की दिशा में तेजी से प्रगति संभव है।
