वाराणसी
कलयुग में केवल भगवान के नाम संकीर्तन से जन्म–मरण से मुक्ति संभव : संत रामानुज वैष्णव दास
वाराणसी। मिर्जामुराद क्षेत्र के प्रतापपुर ग्राम सभा में सर्वकल्याणार्थ आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन गुरुवार को कथा व्यास संत श्री रामानुज वैष्णव दास जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि कलयुग में केवल भगवान के नाम संकीर्तन से ही मनुष्य जन्म–मरण के बंधन से मुक्त हो सकता है।
उन्होंने कहा कि सतयुग में हजारों वर्षों की तपस्या से जो फल प्राप्त होता था, वह कलयुग में भगवान के नाम कीर्तन से सहज ही मिल जाता है। त्रेता और द्वापर युग में योग साधना एवं यज्ञ-अनुष्ठान से जो फल मिलते थे, वही फल इस युग में भगवान के भजन और चिंतन से सुलभ हैं। इसमें किंचित मात्र भी संदेह नहीं है।
पूज्य महाराज ने ध्रुव, प्रह्लाद और गजेन्द्र मोक्ष के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए भजन-कीर्तन की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि कलयुग में जिस विधि-विधान से जप, तप और पूजा होनी चाहिए, वह हर किसी के लिए संभव नहीं है, किंतु भगवान के भजन में किसी विशेष सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। सच्ची श्रद्धा और समर्पण ही पर्याप्त है।
उन्होंने आगे कहा कि जो व्यक्ति गृहस्थ आश्रम में रहकर भगवान का भजन नहीं कर पाता, वह मठ-मंदिरों में जाकर भी सच्चे भाव से भजन नहीं कर सकेगा। गृहस्थ आश्रम को सबसे श्रेष्ठ बताते हुए उन्होंने कहा कि भगवान का अवतार भी गृहस्थों के यहां ही होता है।
कथा के दौरान पूर्व ग्राम प्रधान रुद्र प्रकाश सिंह, अजय कुमार सिंह, दशरथ मिश्रा, ज्ञान शंकर मिश्र, प्रधान बृजेश यादव, बच्चा पांडेय, आशू मिश्रा, कैलाश पटेल, मुन्ना पटेल, राजेश राजभर, मुन्ना राजभर, राधे राजभर, निरंकार राजभर, राजू हरिजन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
