गोरखपुर
मोदी जी, कोर वोटर की चुप्पी चेतावनी है – अब भी समय है
कोर वोटर/समर्थकों की नाराज़गी उजागर: अरुण कुमार मिश्रा की कलम से सियासी चेतावनी
गोरखपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, यह प्रश्न अब केवल राजनीतिक विश्लेषण का विषय नहीं रहा, बल्कि देश के उस कोर वोटर की आत्मिक पीड़ा बन चुका है जिसने आपको वैचारिक विश्वास, त्याग और संघर्ष के बल पर सत्ता के शिखर तक पहुँचाया। वही वोटर, जो कभी आपके लिए हर आलोचना से भिड़ जाता था, आज चुप है—और राजनीति में चुप्पी सबसे बड़ा संकेत होती है।
आपके कार्यक्रमों की लाइव कवरेज पर घटते व्यूज़, मन की बात में कम होती रुचि और चुनावी दावों का सिमटना इस बात का प्रमाण है कि कहीं न कहीं आप अपने कोर समर्थक की भावनाओं को पढ़ने में चूक रहे हैं। देश ने आपके नेतृत्व में विकास के नए आयाम छुए, इसमें संदेह नहीं; लेकिन केवल विकास ही सब कुछ नहीं होता, विचार और सम्मान भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं।
नूपुर शर्मा का निष्कासन, बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं और हिंदुओं पर अत्याचार पर चुप्पी, कश्मीर में चुनाव, पालघर के साधुओं और कन्हैयालाल जैसे मामलों पर संवेदनहीनता—इन घटनाओं ने सवर्ण समाज सहित आपके वैचारिक समर्थकों को भीतर तक आहत किया है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर मौन, जातीय जनगणना और आरक्षण विस्तार की बातें, एससी-एसटी एक्ट को और कठोर बनाना—ये सभी निर्णय उस वर्ग को असहज करते हैं जिसने आपको तुष्टीकरण की राजनीति से मुक्ति की आशा में समर्थन दिया था।
इतिहास सिखाता है कि सत्ता का पतन अचानक नहीं होता, वह उपेक्षित भावनाओं से जन्म लेता है। अभी भी समय है—अपने कोर वोटर, विशेषकर सवर्ण समाज की आशंकाओं और अपेक्षाओं को समझिए। क्योंकि वही वर्ग, जो कभी आपकी सबसे बड़ी ताकत था, आज सबसे बड़ा प्रश्न भी बनता जा रहा है।
