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फार्म-7 के कथित दुरुपयोग पर उठे सवाल, लेकिन बैठक में सन्नाटा
राजनीतिक दलों की मौजूदगी में एसआईआर-2026 की समीक्षा, कार्रवाई के वादे हवा-हवाई?
संतकबीर नगर। जिले में निर्वाचक नामावलियों के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर)-2026 अभियान को लेकर जहां एक ओर प्रशासन पारदर्शिता और निष्पक्षता के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर फार्म-7 के कथित दुरुपयोग का मामला अब गंभीर सवाल खड़े करने लगा है।
जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों के साथ एसआईआर-2026 की अद्यतन स्थिति एवं प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, संशोधन और विलोपन से जुड़े फॉर्म-5, फॉर्म-6 एवं फार्म-7 की प्रक्रियाओं पर चर्चा हुई, लेकिन सबसे गंभीर मुद्दा—बल्क में फार्म-7 पाए जाने का मामला—पूरी तरह नदारद रहा।
दो दिन पहले का मामला, लेकिन बैठक में सन्नाटा
उल्लेखनीय है कि दो दिन पूर्व मेहदावल और खलीलाबाद विधानसभा क्षेत्रों के दर्जनों बूथों पर हजारों की संख्या में फार्म-7 पकड़े गए थे, जिन्हें समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक रूप से उजागर किया था।
आरोप है कि इन फार्म-7 में करीब 90 प्रतिशत आवेदन अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं से संबंधित थे, जिससे मतदाता सूची से नाम काटे जाने की आशंका और गहराती जा रही है।
प्रदर्शन के दौरान जिलाधिकारी द्वारा इस पूरे प्रकरण में कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, लेकिन गुरुवार को हुई आधिकारिक बैठक में न तो इस मुद्दे पर कोई जानकारी दी गई और न ही यह बताया गया कि अब तक क्या कार्रवाई हुई है।
राजनीतिक दलों ने उठाया सवाल, लेकिन जवाब नहीं
बैठक में मौजूद कुछ राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने फार्म-7 के गलत इस्तेमाल को लेकर चिंता जरूर जताई, लेकिन जिलाधिकारी की ओर से इसे लेकर कोई ठोस कार्रवाई या जांच रिपोर्ट साझा नहीं की गई, जिससे यह मामला बैठक में ही रफा-दफा होता नजर आया।
क्या एक समुदाय को बनाया जा रहा है निशाना?
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या मतदाता सूची से नाम काटने की यह प्रक्रिया जानबूझकर एक विशेष समुदाय को निशाना बनाकर की जा रही है? क्या प्रशासन सब कुछ जानकर भी अनसुना कर रहा है? या फिर इस पूरे खेल के पीछे कोई ऐसा मास्टरमाइंड है, जिस पर कार्रवाई करने से परहेज किया जा रहा है?
क्षेत्र में तेजी से मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट जवाबों का अभाव लोगों के संदेह को और मजबूत कर रहा है।
एसआईआर-2026 का कार्यक्रम प्रशासन के अनुसार—
06 फरवरी 2026: दावे एवं आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तिथि
27 फरवरी 2026 तक: निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा सुनवाई व सत्यापन
03 मार्च 2026 तक: मतदाता सूची की जांच
06 मार्च 2026: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन
राजनीतिक दलों के साथ बैठक औपचारिक रूप से संपन्न हो गई, लेकिन फार्म-7 के कथित दुरुपयोग जैसे गंभीर मुद्दे पर खामोशी कई सवाल छोड़ गई। अब देखना यह होगा कि प्रशासन अपने वादों पर अमल करता है या फिर यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
