गोरखपुर
विरासत गलियारे की आड़ में सार्वजनिक गली पर कब्जे का खेल, मोहल्ले की सांसों पर संकट
गोरखपुर के रेती चौक से घंटाघर रोड तक फैला इलाका आज विकास नहीं, बल्कि विवेकहीन अतिक्रमण का दंश झेल रहा है। विरासत गलियारे जैसे पवित्र और जनहितकारी नाम की आड़ में नगर निगम की सार्वजनिक गली पर बढ़ता निर्माण कार्य मोहल्लेवासियों के लिए पीड़ा और आक्रोश का कारण बन गया है। जिस गली से कभी बच्चों की किलकारियां और बुजुर्गों की धीमी चाल गुजरती थी, वही गली आज दीवारों और निर्माण सामग्री के बोझ तले कराह रही है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि एक भू-स्वामी ने निजी स्वार्थ में सार्वजनिक संपत्ति को निगलने का दुस्साहस किया है। लोगों ने विरोध दर्ज कराया, पर अब तक जिम्मेदार विभागों की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है। यह केवल जमीन का नहीं, बल्कि जनता के अधिकार और विश्वास का मामला है। यदि प्रशासन ने तुरंत स्वतः संज्ञान नहीं लिया, तो यह अतिक्रमण भविष्य में एक खतरनाक नजीर बन जाएगा। जनता करारा प्रहार चाहती है—अन्याय पर, अतिक्रमण पर और लापरवाही पर।
