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गोरखपुर

खजनी तहसील में अधिवक्ताओं का उबाल: तहसीलदार हटाओ, न्याय व्यवस्था बचाओ!

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गोरखपुर। खजनी तहसील के सम्पूर्ण समाधान दिवस में शनिवार को अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। बार एसोसिएशन खजनी के अध्यक्ष के.के. सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों अधिवक्ताओं ने तहसीलदार की कार्यशैली को न्याय व्यवस्था के लिए खतरा बताते हुए उनके तत्काल स्थानांतरण और न्यायिक पद से हटाने की जोरदार मांग की।

अधिवक्ताओं का आरोप है कि तहसीलदार द्वारा लगातार लापरवाही, अधिवक्ताओं की अनदेखी, अभद्र व्यवहार और मुकदमों की समय से पहले सुनवाई जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। इससे वादकारियों को न्याय में देरी हो रही है और न्यायालय की गरिमा धूमिल हो रही है। अधिवक्ताओं ने इसे व्यक्तिगत मुद्दा नहीं, बल्कि पूरी न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर हमला करार दिया।

प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम प्रशासन सहदेव मिश्रा को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में लिखा गया कि बार-बार मौखिक और लिखित शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। एडीएम ने उचित जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया, मगर अधिवक्ताओं ने साफ चेतावनी दी—‘मांगें पूरी नहीं हुईं तो तहसील परिसर में धरना, तालाबंदी और पूर्ण कार्य बहिष्कार होगा।’

बार एसोसिएशन के महामंत्री राजनाथ दूबे ने कहा, “न्यायिक कार्यप्रणाली लगातार प्रभावित हो रही है। वादकारी और अधिवक्ता दोनों परेशान हैं।” वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजदेव प्रियदर्शी, उपाध्यक्ष अनूप सिंह, बृजेन्द्र यादव, कोषाध्यक्ष दीपक मिश्र, संयुक्त मंत्री गजेन्द्र कुमार और विनोद सिंह , सत्य प्रकाश श्रीवास्तव , शशि शेखर सिंह बार एसोशिएशन चुनाव आयुक्त रामप्रीत यादव आदि  लोगो ने भी एक स्वर में कहा कि अब बर्दाश्त की सीमा पार हो चुकी है।

अधिवक्ताओं ने जोर देकर कहा कि यह संघर्ष न्याय व्यवस्था को सुचारु, पारदर्शी और जन-हितैषी बनाने के लिए है। यदि प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया तो खजनी तहसील जल्द ही एक बड़े आंदोलन का गढ़ बन सकती है। स्थानीय स्तर पर यह घटना न्यायिक प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

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