वाराणसी
एसिड अटैक पीड़िता प्रोफेसर मंगला कपूर की संघर्ष गाथा को मिला राष्ट्रीय सम्मान
वाराणसी। प्रोफेसर मंगला कपूर को पद्मश्री सम्मान मिलने से दिव्यांग समाज में खुशी की लहर दौड़ गई है। एसिड अटैक की शिकार रह चुकी दिव्यांग प्रोफेसर मंगला कपूर की इस उपलब्धि को उनके लंबे संघर्षों की जीत के रूप में देखा जा रहा है। राज्य सलाहकार बोर्ड दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सदस्य डॉक्टर उत्तम ओझा ने उनके आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की और पद्मश्री पुरस्कार मिलने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि मंगला कपूर का जीवन संघर्ष, साहस और आत्मबल की मिसाल है।

डॉक्टर उत्तम ओझा ने बताया कि मंगला कपूर ने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता चुना। वर्ष 1965 में मात्र 12 वर्ष की उम्र में जब वह पाकिस्तान से भारत आयी थीं, उसी दौरान कबीर चौरा स्थित उनके आवास पर रात में सोते समय उन पर एसिड अटैक किया गया था। इस हमले में मंगला कपूर और उनके भाई कैलाश कपूर दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस दर्दनाक घटना के बाद उनके संघर्षों की एक नई दास्तान शुरू हुई, जिसे उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘सीरत’ के रूप में शब्दों में पिरोया है। डॉक्टर उत्तम ओझा ने कहा कि पद्मश्री सम्मान मंगला कपूर के अदम्य साहस और समाज के लिए किए गए योगदान की सच्ची पहचान है।
