चन्दौली
विधि-विधान से हुई सरस्वती पूजा, भक्ति संगीत और जयकारों से गूंजा नगर
देर रात तक पंडालों में चला दर्शन-पूजन कार्यक्रम
चंदौली (जयदेश)। बसन्त ऋतु के आगमन का प्रतीक है बसंत पंचमी का पर्व। हिन्दू धर्म में ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी सरस्वती को सम्मान देने का उत्सव है। यह विद्यार्थियों, कलाकारों और विद्वानों के लिए एक शुभ दिन है । बुद्धि और रचनात्मकता के लिए मां सरस्वती से आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं। उन्हें मां वीणावदनी की पूजा अर्चना करना चाहिए। शुक्रवार को नगर पंचायत स्थित विभिन्न पूजा पंडाल में मां की प्रतिमा स्थापित कर भक्तों ने विधि विधान से पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना की। पूजा पंडाल में देर रात तक दर्शन पूजन कार्यक्रम चलता रहा।

पूजा पंडाल को आकर्षक विद्युत झालरों से सजाया गया था। वही डीजे पर बज रहे भक्ति संगीत से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। पूरे दिन मां के जयकारे से पंडाल गुंजायमान रहा। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छींटा, जिससे देवी सरस्वती प्रकट हुईं। देवी सरस्वती ने वीणा बजाया जिसकी मधुर वाणी से सृष्टि में जीवन का संचार हुआ। तभी से देवी सरस्वती को ज्ञान, संगीत और कला की देवी माना जाता है।
इस तिथि पर बसन्त पन्चमी मनाए जाने लगी। बसंत पंचमी पर्व को लेकर नगर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। नगर पंचायत के श्रीराम जानकी शिव मठ मंदिर, श्री महावीर मंदिर, गंगा रोड, मां सती सेवा समिति, शंकर मोड़, जिला अस्पताल व इलिया धरौली मार्ग सहित अन्य स्थानों पर मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की गई थी। इस दौरान देर रात्रि तक भक्तों का तांता लगा रहा।
