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वाराणसी

ठंड में बढ़ा हार्ट-ब्रेन अटैक का खतरा, बीपी-शुगर वालों को विशेष सावधानी

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जांच केंद्रों पर भीड़; ईसीजी, टूडी इको और टीएमटी कराने वालों की कतार

वाराणसी। ठंड के मौसम में दिल और दिमाग से जुड़ी बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। बीएचयू अस्पताल के हृदय रोग विभाग की ओपीडी में हर सप्ताह 100 नए मरीजों में हृदय रोग की पुष्टि हो रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें हर तीसरे मरीज की उम्र 40 वर्ष से कम पाई जा रही है। वहीं, न्यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी में भी ब्रेन स्ट्रोक के हर सप्ताह करीब 120 नए मरीज सामने आ रहे हैं। पिछले दो महीनों से इस तरह के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

डॉक्टरों के अनुसार ठंड के चार महीने नवंबर से फरवरी तक नसों में रक्त प्रवाह सामान्य गति से नहीं हो पाता, जिससे दिल और दिमाग संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बदलती जीवनशैली, बिगड़ी दिनचर्या और खानपान में लापरवाही के कारण अब कम उम्र में ही हृदय रोग और ब्रेन से जुड़ी समस्याएं सामने आने लगी हैं। ईसीजी, टूडी इको और टीएमटी जांच कराने वालों की भीड़ जांच केंद्र के बाहर तक देखी गई।

बीएचयू अस्पताल के हृदय रोग विभाग के प्रो. ओमशंकर ने बताया कि ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 250 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें कई मरीज बेचैनी, अधिक पसीना आने और दिल की धड़कन तेज होने जैसी शिकायतें लेकर आते हैं। जांच के बाद लगभग 25 मरीजों में हृदय रोग की पुष्टि हो रही है। उन्होंने बताया कि नए मरीजों में हर तीसरे की उम्र 40 साल से कम है। दो वर्ष पहले तक अधिकतर मरीज 50 वर्ष से ऊपर के मिलते थे, लेकिन अब यह उम्र घटती जा रही है। हार्ट अटैक से होने वाली मौतों में भी 50 वर्ष से कम उम्र के मरीजों की संख्या अधिक देखी जा रही है।

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आईएमए के निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि सामान्य मौसम की तुलना में ठंड में नसों में खून का थक्का जमने की समस्या बढ़ जाती है। इन दिनों ओपीडी में मरीजों की संख्या करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है। पहले सामान्य मौसम में 15 से 20 मरीजों में हृदय रोग की पुष्टि होती थी, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 35 तक पहुंच गई है।

आईएमएस बीएचयू न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. आरएन चौरसिया ने बताया कि हर साल जनवरी से अक्तूबर तक ओपीडी में औसतन 15 ब्रेन स्ट्रोक के मरीज आते हैं, लेकिन ठंड के चार महीने नवंबर से फरवरी में यह संख्या दोगुनी होकर 30 तक पहुंच जाती है। पिछले दो महीनों में विभाग की ओपीडी में हर सप्ताह करीब 120 मरीजों में ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण देखे गए हैं। ऐसे मरीजों को दवा के साथ बचाव के उपाय भी बताए जा रहे हैं।

प्रो. विजयनाथ मिश्रा ने बताया कि ठंड के मौसम में नसों के सिकुड़ने से ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ जाता है। खून का थक्का बनने के कारण रक्त प्रवाह धीमा हो जाता है, जिसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है। ओपीडी में ऐसे 20 मरीजों में ब्रेन स्ट्रोक की पुष्टि हो रही है, जिन्हें पहले से शुगर और बीपी की समस्या है।

डॉक्टरों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा कि सुबह 7 बजे तक टहलने से बचना चाहिए, क्योंकि इस समय हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा अधिक रहता है। बाहर जाकर व्यायाम करने के बजाय घर में योग करना बेहतर रहेगा। जिन लोगों को पहले से बीपी या शुगर की समस्या है, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। साथ ही जरूरत के अनुसार शरीर को गर्म कपड़ों से ढककर रखना चाहिए, ताकि नसों में रक्त प्रवाह निरंतर बना रहे।

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