गोरखपुर
खजनी में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन उमड़ा भक्ति का सागर
गोरखपुर के खजनी बाजार में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा पुराण के दूसरे दिन गुरुवार की शाम भक्ति और अध्यात्म से सराबोर रही। प्रतिष्ठित व्यापारी श्री रामप्यारे अग्रहरि और उनका परिवार, भगवान श्रीकृष्ण तथा मां कोटही के आशीर्वाद से इस आयोजन का संचालन कर रहे हैं, जो प्रतिदिन श्रद्धालुओं में नई आस्था का संचार कर रहा है।
कथा व्यास आचार्य पंडित अरविंद प्रताप मिश्र ने अपने प्रभावी, मधुर और मन को स्पर्श करने वाले प्रवचनों से श्रोताओं को मोहित कर लिया। मंच पर विद्यमान अन्य आचार्यों और संगीतज्ञों के सहयोग से कथा का वातावरण और भी पवित्र और मनोहारी बन गया। मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और कीर्तन-स्वर से संपूर्ण परिसर भक्ति-मय हो उठा।
दूसरे दिन की कथा में माता भगवती सती की उस वेदना को विस्तार से प्रस्तुत किया गया, जिसमें वे अपने आराध्य भगवान शिव का अपमान सह न पाने पर पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में आत्मदाह कर लेती हैं। इस प्रसंग ने श्रोताओं को गहन भावुकता में डुबो दिया और सभी मानो उस समय के दुखद क्षण के साक्षी बन गए।
इसके बाद माता शैलपुत्री के रूप में उनके पुनः अवतरण और हिमालय की पुत्री भगवती पार्वती बनकर भगवान शिव से पुनर्मिलन के पावन प्रसंग का दिव्य वर्णन किया गया। कथा की प्रस्तुति ऐसी जीवंत रही कि श्रद्धालु स्वयं को देव-लीला के मध्य अनुभव करते रहे।
कथा के अंत में भव्य भगवत आरती संपन्न हुई। आरती की लौ में हर भक्त की आंखें श्रद्धा से जगमगा उठीं। इसके बाद भोग-प्रसाद का वितरण किया गया, जिसे ग्रहण करने के लिए भक्तों की लंबी पंक्ति नजर आई। सभी श्रद्धालु प्रसन्नचित होकर अपने घरों को लौटे और अगले दिन की कथा के लिए उत्सुकता जाहिर की। यह भक्ति का ऐसा पावन प्रवाह है, जो मन को शांति, पुण्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है।
