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गाजीपुर

धनतेरस पर यमदीपदान का है विशेष महत्व

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बहरियाबाद (गाजीपुर)। धनतेरस के पर्व पर शनिवार को बहरियाबाद और आसपास के क्षेत्रों में त्योहार की रौनक देखने को मिली। बाजारों में सुबह से ही खरीदारी को लेकर भीड़ जुटी रही। सोना-चांदी, बर्तन और पूजन सामग्री की दुकानों पर ग्राहकों का तांता लगा रहा।

धनतेरस के दिन दीप जलाने का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है, जिसे यम दीपदान कहा जाता है। मान्यता है कि यह दीप मृत्यु के देवता यमराज को समर्पित होता है। ऐसा करने से परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

पंडितों के अनुसार, धनतेरस पर कुल 13 दीपक जलाना शुभ माना जाता है, जिनमें सबसे प्रमुख होता है यमराज के नाम का चौमुखी दीपक। यह दीपक सूर्यास्त के बाद शुभ मुहूर्त में जलाया जाता है। परंपरा के अनुसार, यह दीपक मिट्टी या गेहूं के आटे से बनाकर उसमें सरसों का तेल और चार बत्तियां डाली जाती हैं।

दीपक को घर के बाहर, विशेषकर मुख्य द्वार या नाली के पास दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखा जाता है, क्योंकि दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है। दीपक को सीधे भूमि पर न रखकर चावल, गेहूं या फूल के आसन पर रखना शुभ होता है।

दीप जलाते समय लोग यमराज से दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि इस विधि से किया गया यमदीपदान घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर करता है और माँ लक्ष्मी, भगवान कुबेर व धन्वंतरि की कृपा बनी रहती है।

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