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चन्दौली

पुलिस के खिलाफ न्यायाधीश ने दर्ज की शिकायत

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चंदौली। एक ओर प्रदेश की योगी सरकार पत्रकारों को सम्मान और सुरक्षा देने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर पुलिस द्वारा पत्रकारों के साथ अमानवीय व्यवहार की घटनाएं सामने आ रही हैं।

विगत दिनों पत्रकार मनीष रावत ने होली के दिन दो पक्षों के बीच मारपीट की सूचना चौकी इंचार्ज अभिषेक शुक्ला और सीओ आशुतोष तिवारी को दी थी। लेकिन पत्रकार को सूचना देना भारी पड़ गया। जब पत्रकार जलीलपुर पुलिस चौकी पर पहुंचे, तो चौकी इंचार्ज ने उन्हें अंदर बुलाकर आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए बदसलूकी की।

जब पत्रकार ने अपना परिचय दिया, तो सिपाहियों के साथ मिलकर उसकी पिटाई की गई। साथ ही वर्दी का धौंस दिखाते हुए धमकी दी गई कि यदि इस बारे में किसी से कुछ कहा, तो गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया जाएगा।

इस घटना के बाद पत्रकार मनीष रावत ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए केस संख्या 0000081/25 दर्ज कर लिया है। एससी/एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश राम बाबू यादव ने शिकायत को दर्ज कर लिया है।

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न्यायालय में शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस विभाग में खलबली मच गई है। विदित हो कि पत्रकार मनीष रावत के साथ चौकी इंचार्ज अभिषेक शुक्ला, सिपाही अतुल सिंह और अनिल कुमार अंचल ने जातिसूचक गालियां देते हुए लात-घूंसों से पिटाई की थी।

इसके बाद पत्रकार को मुगलसराय कोतवाली लाया गया, जहां पूर्व कोतवाली प्रभारी विजय बहादुर सिंह ने भी अभद्र व्यवहार करते हुए उसे हवालात में डाल दिया। साथ ही पत्रकार पर फर्जी रूप से धारा 151 में चालान कर दिया गया।

पीड़ित पत्रकार ने जमानत कराने के बाद पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगायी, लेकिन न्याय न मिलने पर उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। पत्रकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व सिविल बार एसोसिएशन अध्यक्ष राकेश रत्न तिवारी उर्फ टोपी गुरु ने पक्ष रखा।

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