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वाराणसी

29 अक्टूबर को मनाया जाएगा धनतेरस

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वाराणसी। ज्योतिपर्व की शुरुआत धनतेरस से मानी जाती है जो इस बार 29 अक्टूबर को मनाई जाएगी। मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे इसी कारण लोग इस दिन बर्तन खरीदकर उनकी पूजा करते हैं। धन-संपत्ति की वृद्धि के लिए तांबे के बर्तन को शुभ माना जाता है।

नई चीजें लाती हैं खुशहाली

भगवान धन्वंतरि भगवान विष्णु के अंशावतार माने जाते हैं, इसीलिए धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। इस दिन कुबेर, भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी का पूजन विशेष महत्व रखता है।

लोग सोने-चांदी के सिक्के, विशेष रूप से लक्ष्मी-गणेश के चित्र वाले, या स्टील और तांबे के बर्तन भी खरीदते हैं। भृगु संहिता के विशेषज्ञ पं. वेदमूर्ति शाखी के अनुसार, धनतेरस पर धन्वंतरि देव की पूजा 16 विधियों से करनी चाहिए जिसमें आसन, अर्घ्य, स्नान, गंध, पुष्प और दीप का समर्पण शामिल है। धनतेरस के दिन कुछ भी नया खरीदना घर में सुख-समृद्धि का संकेत माना जाता है।

हालांकि खरीदारी के सामान को दीपावली पूजा तक उपयोग में नहीं लाने का नियम है और विशेष रूप से पूजा में उसका प्रयोग करना चाहिए।

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झाड़ू पर बांधें सफेद धागा

धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की भी विशेष मान्यता है। मत्स्य पुराण के अनुसार झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है और इस दिन इसे खरीदने से आर्थिक संकटों से राहत मिलती है। फूल और सींक वाला झाड़ू शुभ माना जाता है। झाड़ू खरीदकर उस पर सफेद धागा बांधने से दरिद्रता से मुक्ति मिलती है। शाम को मुख्य द्वार और आंगन में दीप जलाने चाहिए और यम देव के लिए दीपदान करना चाहिए।

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