गोरखपुर
सम्पूर्ण समाधान दिवस बना लापरवाही का आईना, एडीएम प्रशासन ने दिखाया सख्त रुख
गोरखपुर। जनपद के खजनी तहसील में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस उस समय सुर्खियों में आ गया, जब कई महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारी बिना सूचना के अनुपस्थित पाए गए।
आमजन की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए आयोजित इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यक्रम में ऐसी घोर लापरवाही देखकर एडीएम प्रशासन सहदेव मिश्रा ने तत्काल कड़ा कदम उठाया और अनुपस्थित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल अनुपस्थित (कार्यवाही हेतु) कर दिया। वहीं एसीडीएम राजेश प्रताप सिंह ने भी अधिकारियों की गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई।
शनिवार को खजनी तहसील परिसर में सम्पूर्ण समाधान दिवस एडीएम प्रशासन सहदेव मिश्रा की अध्यक्षता में प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम में एसडीएम खजनी राजेश प्रताप सिंह, तहसीलदार ध्रुवेश सिंह, खंड विकास अधिकारी रमेश शुक्ल, खंड शिक्षाधिकारी सावन दुबे सहित मौजूद अधिकारियों ने फरियादियों की समस्याएं सुनीं। लेकिन जब फरियादों से जुड़े कई विभागों के अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं मिले, तो प्रशासनिक अनुशासन पर सवाल खड़े हो गए।
एडीएम प्रशासन सहदेव मिश्रा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सम्पूर्ण समाधान दिवस शासन की प्राथमिकता में शामिल है और इसमें किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता दूर-दराज से उम्मीद लेकर आती है और यदि जिम्मेदार अधिकारी ही गायब रहें, तो यह शासन-प्रशासन की छवि को धूमिल करता है। इसी के साथ उन्होंने अनुपस्थित अधिकारियों की सूची तलब कर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
एसीडीएम राजेश प्रताप सिंह ने भी अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि समाधान दिवस केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जनता को न्याय दिलाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि जिन विभागों के अधिकारी अनुपस्थित पाए गए हैं, उनके विरुद्ध रिपोर्ट भेजी जाएगी और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराने पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई होगी।
सम्पूर्ण समाधान दिवस के दौरान राजस्व, विकास, शिक्षा, बिजली, आवास और पेंशन से जुड़ी कई शिकायतें सामने आईं। मौजूद अधिकारियों ने फरियादों को गंभीरता से सुना और कई मामलों में मौके पर ही निस्तारण के निर्देश दिए गए, जबकि शेष प्रकरणों को समयबद्ध तरीके से निपटाने के आदेश दिए गए।
प्रशासन की इस सख्ती से एक ओर जहां जनता में भरोसा बढ़ा है, वहीं लापरवाह अधिकारियों में भी स्पष्ट संदेश गया है कि अब समाधान दिवस को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।
