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गाजीपुर

संस्कृत पर डीएमके नेता के बयान से भड़के भाजपा नेता पारसनाथ राय

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गाजीपुर के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व लोकसभा प्रत्याशी पारसनाथ राय ने संसद में डीएमके (DMK) नेता दयानिधि मारन द्वारा संस्कृत भाषा के खिलाफ दिए गए बयान की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे न केवल घिनौना और अपमानजनक बताया बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और सभ्यता पर सीधा हमला करार दिया।

पारसनाथ राय ने कहा कि संस्कृत भारत की ज्ञान-परंपरा की आत्मा है और इसका विरोध करना देश की सांस्कृतिक विरासत के खिलाफ साजिश के समान है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि संस्कृत केवल भारत की प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर ज्ञान, विज्ञान, चिकित्सा, गणित, दर्शन और साहित्य की आधारशिला रही है। यूनेस्को समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थान इसे दुनिया की सबसे वैज्ञानिक भाषा मानते हैं। ऐसे में संसद में इस भाषा के खिलाफ बयान देना भारतीय अस्मिता और सांस्कृतिक धरोहर का अपमान है।

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उन्होंने केंद्र सरकार और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के संस्कृत उत्थान और संरक्षण के प्रयासों की सराहना की। नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत सरकार संस्कृत को पुनर्जीवित करने और इसे मुख्यधारा में लाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। संसद में संस्कृत के प्रयोग को प्रोत्साहित करना, प्रश्न पूछने और उत्तर देने की अनुमति देना और इसके संवर्धन के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करना एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे आने वाली पीढ़ियां इस महान भाषा से जुड़ सकेंगी।

पारसनाथ राय ने साफ कहा कि संस्कृत विरोधी मानसिकता, भारत विरोधी मानसिकता के समान है। उन्होंने डीएमके नेता के बयान को तुच्छ राजनीतिक लाभ के लिए भारतीय संस्कृति को कमजोर करने का प्रयास बताया, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार से मांग की कि संस्कृत भाषा का अनादर करने वालों पर उचित कार्रवाई की जाए और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए ठोस नीतियाँ बनाई जाएँ।

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