वाराणसी
संत अतुलानंद कॉन्वेंट स्कूल में आयोजित हुई साइबर सुरक्षा कार्यशाला
वाराणसी। डिजिटल तकनीक के तेज़ी से विस्तार ने जहाँ जीवन को सरल बनाया है, वहीं साइबर अपराधों के रूप में नई चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। इसी विषय को केंद्र में रखते हुए संत अतुलानंद कॉन्वेंट स्कूल, कोइराजपुर में विशेष साइबर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। इस अवसर पर एसीपी कैंट नितिन तनेजा ने विद्यार्थियों को साइबर अपराधों की जटिलताओं और उनसे बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी।

यह कार्यशाला पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश एवं पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी के संयुक्त दिशा-निर्देशन में संपन्न हुई।अपने संबोधन में नितिन तनेजा ने बताया कि आज अपराधी तकनीक का सहारा लेकर धोखाधड़ी के कई नए तरीके अपनाते हैं। फिशिंग, फेक यूज़, मैलवेयर अटैक, साइबर बुलिंग, फर्जी पेमेंट फ्रॉड, इन्वेस्टमेंट व लोन स्कैम, डिजिटल अरेस्ट, ओएलएक्स और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर ठगी – ये सब आज के आम अपराध हैं।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अपराधी कभी भय तो कभी लालच दिखाकर लोगों को अपने जाल में फँसाते हैं, ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।कार्यशाला में पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी द्वारा प्रकाशित “साइबर ज्ञान पुस्तिका” का भी उल्लेख किया गया।
इसमें साइबर अपराधों की पहचान, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया, पासवर्ड प्रबंधन, सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, वित्तीय लेन-देन की सुरक्षा, क्रेडिट/डेबिट कार्ड प्रोटेक्शन और मोबाइल गुम होने पर उठाए जाने वाले कदम जैसी जानकारियाँ दी गई हैं। खासतौर पर महिलाओं और बच्चों की साइबर सुरक्षा पर विशेष मार्गदर्शन शामिल है।
पुस्तिका के नारे – “सावधान रहें, सतर्क रहें; साइबर सुरक्षित रहें” और “सोच-समझकर क्लिक करें, साइबर खतरे से दूर रहें” विद्यार्थियों को सुरक्षा की दिशा में प्रेरित करते हैं।
सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने साइबर अपराधों से जुड़े कई सवाल पूछे और वास्तविक घटनाओं के उदाहरणों के माध्यम से नई जानकारियाँ प्राप्त कीं। सोशल मीडिया पर साइबर बुलिंग, फर्जी प्रोफाइल, डिजिटल ठगी और बैंकिंग फ्रॉड जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
नितिन तनेजा ने विद्यार्थियों को साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि किसी भी धोखाधड़ी की स्थिति में घबराएँ नहीं, तुरंत शिकायत दर्ज करें, क्योंकि त्वरित कार्रवाई ही साइबर अपराधियों पर सबसे बड़ा प्रहार है।विद्यालय के उप निदेशक आयुष्मान सिंह ने इस आयोजन को समयानुकूल और अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इस ज्ञान से विद्यार्थी न केवल स्वयं को, बल्कि अपने परिवार को भी साइबर अपराधों से सुरक्षित कर सकेंगे।
प्रधानाचार्या नीलम सिंह ने कहा कि यदि डिजिटल युग के विद्यार्थी साइबर अपराधों के प्रति सजग होंगे, तो वे खुद को सुरक्षित रखने के साथ-साथ समाज में भी जागरूकता फैला सकेंगे। उन्होंने अंत में एसीपी नितिन तनेजा और पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस कार्यशाला को विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी बताया।
