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धर्म-कर्म

रमजान विशेष : पांच वक्त पढ़ी जाने वाली नमाज से कितनी अलग होती है तरावीह की नमाज ?

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जानें क्या है अदा करने का सही तरीका

वाराणसी। इस्लाम धर्म में रमजान का महीना सबसे पाक और बरकतों से भरा होता है। इस महीने में रोजाना पांच वक्त की फर्ज नमाज के अलावा विशेष नमाज तरावीह भी पढ़ी जाती है, जो ईशा की नमाज के बाद अदा की जाती है।

तरावीह की नमाज सुन्नत-ए-मुअक्कदा

तरावीह की नमाज पैगंबर मुहम्मद द्वारा पढ़ी गई सुन्नत-ए-मुअक्कदा है, यानी इसे पढ़ना बेहद सवाब का काम है, लेकिन न पढ़ने पर कोई गुनाह नहीं मिलता। पहली बार इसे पैगंबर साहब ने रमजान में अदा किया था, तभी से यह एक सुन्नत मानी जाती है।

तरावीह और पांच वक्त की नमाज में अंतर

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तरावीह की नमाज 2-2 रकात करके 20 रकातों में अदा की जाती है, जबकि पांच वक्त की नमाज में 2, 3 या 4 रकातें होती हैं। तरावीह में हर रकात में अलग-अलग सूरह पढ़ने की परंपरा है, जबकि नियमित नमाज में इसकी कोई पाबंदी नहीं होती।

तरावीह की फजीलत

माना जाता है कि तरावीह की हर सजदे पर 1500 नेकियां मिलती हैं और अल्लाह तआला तरावीह अदा करने वालों पर अपनी रहमत बरसाता है। इस महीने में की गई इबादतों का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।

तरावीह की रकातें और नियत

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इसमें 8 या 20 रकात पढ़ी जा सकती हैं, जिन्हें 2-2 रकात करके अदा किया जाता है। हर 4 रकात के बाद तरावीह की दुआ या तस्बीह पढ़ने का रिवाज है। नमाज के दौरान कोई भी सूरह पढ़ी जा सकती है, लेकिन नियत सबसे महत्वपूर्ण होती है।

क्या तरावीह अकेले पढ़ी जा सकती है?

मर्दों के लिए मस्जिद में जमात के साथ तरावीह पढ़ना बेहतर है, लेकिन अगर संभव न हो तो घर पर भी इसे अदा किया जा सकता है। महिलाओं के लिए इसे घर पर पढ़ना ही उचित माना गया है।

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