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मौलाना शमशुल हुदा के आवास पर ईडी की छापेमारी, दस्तावेज और मोबाइल जब्त

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ब्रिटेन की नागरिकता लेने के बाद भी मदरसे में नौकरी और पेंशन लेने का मामला उजागर

संतकबीरनगर। जनपद में मौलाना शमशुल हुदा के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने बुधवार को छापेमारी की। सुबह करीब आठ बजे लखनऊ से पहुंची तीन सदस्यीय टीम ने उनके घर पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू की। टीम ने घर में मौजूद परिजनों के मोबाइल फोन और महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर जांच प्रक्रिया प्रारंभ कर दी। घर के भीतर मौजूद परिवार के सदस्यों से पूछताछ की जा रही है और अभिलेखों की गहन पड़ताल जारी है।

छापेमारी के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। आवास के बाहर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान तैनात रहे और किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। ईडी की टीम ने मोबाइल फोन, कागजात और अन्य जरूरी दस्तावेजों को जब्त कर उनकी जांच शुरू कर दी है।

कार्रवाई के दौरान मौलाना की पत्नी और बहू से पूछताछ की गई, जबकि उनका बेटा तौसीफ रजा घर पर मौजूद नहीं बताया गया। मामला खलीलाबाद कोतवाली क्षेत्र स्थित मीट मंडी इलाके से जुड़ा हुआ है।

सूत्रों के अनुसार, आजमगढ़ में एक मदरसे के निर्माण और संचालन के नाम पर विदेशों से बड़ी मात्रा में धन जुटाए जाने का मामला सामने आया है। इस प्रकरण में पाकिस्तानी कनेक्शन और इस्लामिक गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की भी जांच आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) द्वारा की जा रही है।

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जांच में यह तथ्य सामने आया है कि मौलाना शमशुल हुदा ने वर्ष 2013 में भारतीय नागरिकता त्यागकर ब्रिटेन की नागरिकता ग्रहण कर ली थी और वर्ष 2007 से लंदन में रह रहे थे। इसके बावजूद आधिकारिक अभिलेखों में उन्हें वर्ष 2017 तक आजमगढ़ के एक मदरसे में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत दर्शाया गया। इस अवधि में वेतन और पेंशन लाभ लेने का मामला भी सामने आया था। अनियमितता उजागर होने पर संबंधित अधिकारियों को निलंबित किया गया था।

बताया जाता है कि वर्ष 2017 में उक्त मदरसे को पहले सील किया गया और बाद में सरकार द्वारा उसकी मान्यता भी रद्द कर दी गई। एटीएस सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान उनके विदेशी संपर्कों और संदिग्ध गतिविधियों की भी पड़ताल की जा रही है, हालांकि अभी तक किसी आधिकारिक निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की गई है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, मौलाना शमशुल हुदा खान पर ‘कुलियातुल बनातीर रजबिया एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी’ और ‘रजा फाउंडेशन’ नामक एनजीओ बनाकर विदेशों से मदरसे के नाम पर फंड एकत्र करने का आरोप है। इन एनजीओ के माध्यम से विदेशी फंडिंग जुटाए जाने की बात सामने आई है।

खलीलाबाद में मदरसे के निर्माण और संचालन के जरिए विदेशों से बड़ी मात्रा में धन एकत्र किए जाने की जानकारी भी एजेंसियों को मिली है। आशंका जताई जा रही है कि इसी विदेशी फंडिंग के माध्यम से संपत्ति अर्जित की गई।

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फिलहाल ईडी और एटीएस वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों, दस्तावेजों और विदेशी फंडिंग के स्रोतों की गहन जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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