वाराणसी
“मोदी–योगी सरकार ने काशीवासियों के साथ छल किया” : अजय राय
वाराणसी। नाइट मार्केट प्रोजेक्ट को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने शुक्रवार को भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि मोदी–योगी सरकार ने नाइट मार्केट प्रोजेक्ट के नाम पर काशी की जनता के साथ जो छल–कपट किया है, उसे पीड़ित दुकानदार कभी माफ नहीं करेंगे। “पीड़ित दुकानदारों के गिरे एक–एक आंसू का हिसाब काशीवासी करेंगे,” उन्होंने कहा।
अजय राय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वाराणसी में शुरू किया गया यह नाइट मार्केट प्रोजेक्ट 11 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ था। उद्देश्य था चौकाघाट से लहरतारा फ्लाईओवर के नीचे डेढ़ किलोमीटर के क्षेत्र में स्थानीय ठेला–पटरी वालों, छोटे व्यापारियों और बेरोजगार युवाओं को रोजगार देना। इस योजना के तहत लगभग 83 गोमटियों (स्टॉल्स) का निर्माण, सुंदर पाथवे, रंगीन लाइटिंग, छतरी सज्जा और अन्य सौंदर्यीकरण कार्य कराए गए। इसे प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट बताया गया था।
लेकिन अजय राय के अनुसार मात्र दो वर्षों में ही यह परियोजना खत्म होने की कगार पर है। दुकानों को उजाड़ा जा रहा है, जिस पर उन्होंने आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “बसाया ही क्यों था जब उजाड़ना ही था? मोदी जी – योगी जी, काशी की जनता की पीठ और पेट दोनों पर आपने खतरा कायम कर दिया है। ये पीड़ित दुकानदार काशीवासी मेरे परिवार के लोग हैं। इनके साथ जो कृत्य आपकी सरकार ने किया, वह निंदनीय है।”
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि 11 करोड़ रुपये में से केवल 5-6 करोड़ रुपये ही वास्तविक निर्माण पर खर्च हुए, शेष राशि कथित तौर पर “कमीशनखोरी” की भेंट चढ़ गई। उन्होंने कहा, “जिस उद्देश्य से नाइट मार्केट की शुरुआत हुई थी – यानी रोजगार सृजन – वह दम तोड़ चुका है। डेढ़–दो सौ दुकानदारों को मार्केट से हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उनके पास न तो कोई वैकल्पिक स्थान है, न मुआवजा, न ही कोई भविष्य की योजना।”
उन्होंने आरोप लगाया कि अब उसी जगह पर 10 करोड़ रुपये की लागत से एक नया सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट शुरू करने की चर्चा है, जिसमें पर्यटकों के बैठने की व्यवस्था और सजावट शामिल होगी। उन्होंने सवाल किया, “जब पुरानी योजना दो साल भी नहीं चली, तो क्या इस नई योजना का भी वही हश्र होगा? क्या गरीबों का रोजगार छीनकर सौंदर्यीकरण करना सही है?”
अजय राय ने कहा कि स्थिति इतनी दयनीय है कि यहां के सत्ताधीश मंत्रियों और विधायकों तक की सुनवाई नहीं हुई। “जब आपकी सुनवाई नहीं है, तो ऐसे में तत्काल जनप्रतिनिधियों को इस्तीफा देकर जनता के समक्ष यह स्वीकार करना चाहिए कि वे योग्य नहीं हैं। प्रधानमंत्री जी के संसदीय कार्यालय वाराणसी, जिसे 2014 में मिनी पीएमओ बताया गया था, वहां से आए निर्देशों की भी अनदेखी हो रही है, तो लोकतंत्र की मर्यादा कहां है?”
स्थानीय दुकानदारों और आम जनता का मानना है कि यह पूरा मामला “कमीशन आधारित प्रोजेक्ट संस्कृति” का हिस्सा है। अजय राय ने मांग की कि नाइट मार्केट प्रोजेक्ट की निष्पक्ष जांच हो और यह पता लगाया जाए कि 11 करोड़ रुपये कहां और कैसे खर्च हुए। साथ ही, हटाए गए दुकानदारों को वैकल्पिक जगह और पुनर्वास के साथ रोजगार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा, “पीड़ित दुकानदारों से काशी के सांसद होने के नाते प्रधानमंत्री जी खुद वार्ता करें और उन्हें पुनर्वास के साथ रोजगार देकर अपने सांसद होने का धर्म निभाएं। इन्हें आपने सपने दिखाकर 2022 में बसाया था और अब उजाड़ा जा रहा है।”
अजय राय ने कहा कि नाइट मार्केट की विफलता केवल एक योजनागत असफलता नहीं, बल्कि उस सिस्टम की विफलता है जो गरीबों को केवल “विकास का चेहरा” बनाकर छोड़ देता है। “प्रधानमंत्री जी, अपने संसदीय क्षेत्र को प्रयोगशाला मत बनाइये। पीड़ित दुकानदारों के संग कांग्रेस पार्टी खड़ी है।”
