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वाराणसी

बीएचयू के लापता छात्र केस में हाईकोर्ट सख्तः ट्रायल कोर्ट को दी त्वरित सुनवाई की हिदायत

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वाराणसी/प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीएचयू के लापता छात्र शिव कुमार त्रिवेदी प्रकरण में ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि मामले की जल्द से जल्द सुनवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने जनहित याचिका निस्तारित करते हुए यह टिप्पणी की।

गौरतलब है कि 13 फरवरी 2020 को लंका पुलिस की अभिरक्षा से शिव कुमार त्रिवेदी रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गया था। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप और कई आदेशों के बाद राज्य सरकार ने दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी और अब उनके खिलाफ चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की जा चुकी है। खंडपीठ ने कहा कि अब ट्रायल कोर्ट के पास मामले का संज्ञान लेकर सुनवाई आगे बढ़ाने का दायित्व है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने दलील दी कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 की धारा 100 के तहत कुछ पुलिसकर्मियों की सीधी जिम्मेदारी बनती है, लेकिन जांच में उन्हें बचाने का प्रयास किया गया।

उल्लेखनीय है कि अधिवक्ता सौरभ तिवारी के पत्र का संज्ञान तत्कालीन मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर ने 19 अगस्त 2020 को लिया था। इसके बाद 29 अक्टूबर 2020 को राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंपी थी।

जांच में यह निष्कर्ष निकला कि शिव कुमार त्रिवेदी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और 15 फरवरी 2020 को वह रामनगर के कुतुलपुर पोखरी में डूब गया था, जिससे उसकी मौत हो गई।

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इस मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष भारत भूषण तिवारी समेत आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ ड्यूटी में लापरवाही और चिकित्सकीय सुविधा न देने के आरोप में आईपीसी की धारा 166 व 304-ए के तहत 17 अगस्त 2022 को एफआईआर दर्ज हुई थी।

विवेचना के बाद हेड कांस्टेबल विजय कुमार यादव, कांस्टेबल शैलेंद्र कुमार सिंह और होमगार्ड संतोष कुमार के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया, जबकि अन्य पांच पुलिसकर्मियों को दोषमुक्त पाया गया।

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