गोरखपुर
बिशनपुरा गांव में 50 वर्षों से निरंतर लग रहा भव्य शारदीय नवरात्र मेला
गोरखपुर। आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम देखने को मिलता है हरपुर बुदहट क्षेत्र के ग्राम बिशनपुरा में, जहां पिछले 50 वर्षों से निरंतर शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर भव्य मेला और रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। यह परंपरा अब गांव की पहचान बन चुकी है और पूरे इलाके में इस रामलीला और मेले की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है।
नवरात्र के आरंभ होते ही गांव का वातावरण भक्तिमय हो उठता है। मां दुर्गा के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठता है। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी यहां 11 दिनों तक अनवरत रामलीला का मंचन किया जा रहा है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की लीलाओं का यह मंचन इतनी भावनात्मक और जीवंत प्रस्तुति के साथ किया जाता है कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठते हैं। प्रत्येक दिन की लीला देखने हजारों की संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण एकत्र होते हैं।

रामलीला के अंतर्गत भगवान श्रीराम के बाल्यकाल से लेकर लंका विजय तक की कथा का सजीव चित्रण किया जाता है। मंचन में स्थानीय कलाकार अपनी भूमिका में पूरी निष्ठा और आस्था के साथ उतरते हैं। विशेष आकर्षण के रूप में रावण दहन का कार्यक्रम हर वर्ष की तरह इस बार भी शानदार ढंग से किया जाएगा, जहां विशालकाय रावण का पुतला जलते ही जय श्रीराम के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठेगा।
रामलीला के समापन के बाद भरत मिलाप का दृश्य प्रस्तुत किया जाता है, जो इस आयोजन का सबसे भावनात्मक और महत्वपूर्ण क्षण होता है। भरत और राम के मिलन का यह दृश्य उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर देता है।

भरत मिलाप के साथ ही इस आयोजन का समापन नहीं होता, बल्कि इसके बाद शुरू होता है भव्य मेला, जो इस क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को नई गति देता है। मेले में दूर-दराज के क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में दुकानदार पहुंचते हैं। खिलौनों, मिठाइयों, कपड़ों, सजावटी सामानों से लेकर झूला-झूलों तक हर प्रकार की दुकानें यहां सजती हैं। महिलाओं और बच्चों के लिए यह मेला विशेष आकर्षण का केंद्र होता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मेले की शुरुआत लगभग 50 वर्ष पूर्व गांव के कुछ वरिष्ठ नागरिकों ने मिलकर की थी, जिनका उद्देश्य धार्मिकता के साथ-साथ लोक संस्कृति को जीवित रखना था। आज यह मेला और रामलीला इस क्षेत्र की आस्था और एकता का प्रतीक बन चुका है।
हरपुर बुदहट का बिशनपुरा गांव नवरात्र के इन 11 दिनों में पूरी तरह श्रद्धा, भक्ति और उत्सव से सराबोर हो जाता है। यहां की परंपरा आज भी जीवंत है और आने वाली पीढ़ियों के लिए यह आयोजन एक प्रेरणास्रोत बना हुआ है।
