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गाजीपुर

बहरियाबाद में धूमधाम से मनाया गया शब-ए-बारात

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इबादत, दुआ और रोशनी से रोशन हुई रात

गाजीपुर। जिले के बहरियाबाद और आसपास के गांवों में शब-ए-बारात का त्योहार धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया गया। देईपुर, रायपुर, झोटना, मुडियारी, बहरियाबाद, पलिवार, तरवां, बनगांव सहित दर्जनों गांवों में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कब्रिस्तानों पर जाकर फातिहा पढ़ा और मस्जिदों को खूबसूरती से सजाया।

शब-ए-बारात को इस्लाम में एक महत्वपूर्ण रात माना जाता है, जिसे नबी करीम हजरत मोहम्मद (स.अ.व.) के जमाने से मनाया जाता आ रहा है। इस रात को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। सुन्नी समुदाय के अनुसार, यह वह रात है जब अल्लाह अपने बंदों के गुनाह माफ करता है और जन्नत के दरवाजे खोल देता है। वहीं, शिया मुसलमान इस रात को इमाम मेहदी (अ.स.) के जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं और पूरी रात इबादत और दुआ में गुजारते हैं।

शब-ए-बारात इस्लामी कैलेंडर के शाबान महीने की 14वीं और 15वीं रात को मनाई जाती है। इस रात को गुनाहों की माफी मांगने, इबादत करने और गरीबों की मदद करने का विशेष महत्व है। कई लोग पूरी रात जागकर नमाज पढ़ते हैं, कुरान की तिलावत करते हैं और खुदा से रहमत की दुआ मांगते हैं।

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इस मुबारक मौके पर एक शेर भी पढ़ा गया:

“खुदा ने रखी है अजमत शबे बरात में,
है नार से भी बराअत शबे बरात में।”

बहरियाबाद और आसपास के इलाकों में इस खास रात की रौनक देखते ही बनी। मस्जिदों और घरों में इबादत के साथ-साथ लोगों ने जरूरतमंदों की मदद कर नेक अमल भी किया।

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