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वाराणसी

पीएमएसएमए दिवस पर हुई 3348 महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच

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गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार प्रसव पूर्व जाँच बेहद जरूरी : सीएमओ

  • प्रसव पूर्व जांच के साथ-साथ परिवार नियोजन परामर्श भी जरूरी
  • स्वस्थ व संतुलित खान-पान के साथ आयरन की गोली लेने की दी सलाह

रिपोर्ट – प्रदीप कुमार

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वाराणसी: सेवापुरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) दिवस पर पहुँचीं फूलनदेवी ने बताया कि उनके जुड़वां बच्चे हैं और अभी वह गर्भ से हैं । दिवस पर उन्होंने पहली प्रसव पूर्व जांच कराई है। डॉक्टर ने हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर, मधुमेह अन्य जाँच निःशुल्क की । सभी जाँचे सामान्य दिखने पर संतुलित व स्वस्थ खान-पान की सलाह दी । एक अन्य गर्भवती प्रीति यादव ने बताया कि आशा कार्यकर्ता की मदद से वह केंद्र पर दूसरी बार की गर्भावस्था की जांच कराई। इसमें महिला चिकित्सक ने कई जाँचें की और नियमित रूप से आयरन की गोली और पोषक आहार के सेवन की सलाह दी ।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी ने बताया कि हर माह की नौ तारीख को मनाए जाने वाला प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) दिवस बुधवार को जिले के 38 स्वास्थ्य इकाईयों पर उत्साहपूर्वक मनाया गया । इस दौरान स्वास्थ्य केन्द्रों पर पहुंची गर्भवती को महिला चिकित्सकों ने प्रसव पूर्व सभी जांच जैसे हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर, ब्लड टेस्ट, वजन व पेट से जुड़ी अन्य जांचें निःशुल्क की गईं। साथ ही लाभार्थियों को परिवार नियोजन के लिए परामर्श भी दिया गया। सीएमओ ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान महिला को कम से कम चार बार प्रसव पूर्व जांच अवश्य करानी चाहिए। इससे उन्हें उपयुक्त चिकित्सीय परामर्श मिलता रहे।
नोडल अधिकारी व डिप्टी सीएमओ डॉ एचसी मौर्य ने कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने, गर्भवती की बेहतर स्वास्थ्य देखभाल, प्रसव पूर्व जांच एवं उन्हें समय पर उचित इलाज मुहैया कराने के लिए पीएमएसएमए दिवस प्रत्येक माह की नौ तारीख को मनाया जाता है। दिवस पर चिकित्सालय पर तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञों द्वारा प्रसव पूर्व जांच की गयी। जांच के बाद उच्च जोखिम गर्भावस्था (एचआरपी) वाली महिलाओं को चिन्हित किया गया और उच्च स्तरीय इकाई पर संदर्भित किया गया एवं निःशुल्क दवा, आवश्यक चिकित्सीय व पोषण परामर्श भी दिया गया।
उन्होने कहा कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को स्वास्थ्य को लेकर बहुत ही सजग रहने की आवश्यकता है। इस दौरान उन्हें संतुलित और स्वस्थ आहार का सेवन करना चाहिए जिससे गर्भस्थ शिशु को भी बेहतर आहार मिलता रहे । गर्भावस्था के दौरान कम से कम 180 आयरन की गोली का सेवन करना चाहिए ताकि रक्त अल्पता की बीमारी को दूर किया जा सके। दिवस के दौरान यदि किसी गर्भवती में कोई गंभीर लक्षण जैसे तेज बुखार, तेज सिरदर्द, धुंधला दिखना, त्वचा का पीलापन होना, दौरे पड़ना, उच्च रक्तचाप, योनि से रक्तस्राव, हाथ पैरों या चेहरे पर सूजन, भ्रूण का कम हिलना या निकलना आदि दिखते हैं तो उन्हें उच्च जोखिम गर्भावस्था (एचआरपी) की श्रेणी में रखा जाता है, जिससे उच्च स्वास्थ्य इकाइयों पर प्राथमिकता के आधार चिकित्सीय सुविधा दी जा सके और सुरक्षित प्रसव कराया जा सके । इसके साथ ही हर माह की 24 तारीख को जिले के सभी एफ़आरयू पर सुरक्षित मातृत्व क्लीनिक दिवस मनाया जाता है।
जिला मातृत्व स्वास्थ्य परामर्शदाता पूनम गुप्ता ने बताया कि जिला महिला चिकित्सालय कबीरचौरा, लाल बहादुर शास्त्री चिकित्सालय रामनगर सहित ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के सभी प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर कुल 3348 गर्भवती की प्रसव पूर्व देखभाल (एएनसी) जांच में 427 महिलाओं को एचआरपी के लिए चिन्हित किया गया।

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