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पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी के बयान पर राहुल-खरगे का हमला

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राहुल गांधी की चेतावनी – पश्चिम एशिया तनाव से बढ़ेगा ऊर्जा संकट

नई दिल्ली। संसद में पश्चिम एशिया संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए इसे रणनीतिक दृष्टि से कमजोर बताया।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री केवल वही निर्णय लेते हैं, जो अमेरिका और इजरायल चाहते हैं और वे भारत के हित में स्वतंत्र फैसले लेने में सक्षम नहीं हैं। मौजूदा विदेश नीति दरअसल प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत नीति बन गई है, जिसका परिणाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि पर असर के रूप में सामने आ रहा है।

संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने विदेश नीति को ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ बताते हुए कहा कि यह स्थिति इसलिए बनी है क्योंकि स्वयं प्रधानमंत्री भी ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ हैं। उन्होंने आगाह किया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर आने वाले समय में एलपीजी, पेट्रोल-डीजल, उर्वरक समेत कई क्षेत्रों पर पड़ेगा और देश में नई समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। सर्वदलीय बैठक बुलाने के फैसले पर उन्होंने कहा कि चर्चा होना उचित है, हालांकि वे पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के चलते उसमें शामिल नहीं हो पाएंगे।

वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में प्रधानमंत्री के बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे देर से आया हुआ बताया और कहा कि इससे जवाब कम और सवाल अधिक पैदा होते हैं। उन्होंने सरकार की कूटनीतिक नीति को असंगत और बदलती हुई बताते हुए पूछा कि क्या इससे भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक स्वायत्तता प्रभावित हुई है और संसद तथा देश को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया।

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खरगे ने होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे भारतीय जहाजों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि करीब 37 से 40 भारतीय ध्वज वाले जहाज, जिन पर लगभग 1100 नाविक सवार हैं और जिनमें करीब 10 हजार करोड़ रुपये का माल है, अब भी सुरक्षित मार्ग की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री द्वारा ईरान से बातचीत के बावजूद इन जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता क्यों सुनिश्चित नहीं किया जा सका, जबकि अन्य देशों को यह सुविधा मिल रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने संसद में ऊर्जा आयात के स्रोतों को 27 से बढ़ाकर 41 देशों तक विस्तार देने की बात कही, फिर भी देश में एलपीजी की कमी, लंबी कतारें, कालाबाजारी और कीमतों में वृद्धि क्यों देखी जा रही है। पश्चिम एशिया की स्थिति की तुलना कोविड जैसी परिस्थिति से करने पर खरगे ने कहा कि महामारी के दौरान देश ने भारी पीड़ा झेली है, जिसमें लाखों लोगों की जान गई और लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ा।

खरगे ने सवाल उठाया कि क्या सरकार देश के 140 करोड़ लोगों को एक बार फिर ऊर्जा संकट, महंगाई, खाद्य और उर्वरक जैसी समस्याओं से जूझने के लिए छोड़ रही है।

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