वाराणसी
परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, ब्याज माफी के नाम पर वसूली का आरोप
वाराणसी। जिले के परिवहन विभाग में बकाया टैक्स पर ब्याज माफी के नाम पर वसूली का मामला सामने आया है। आरोप है कि सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) को दिए गए अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए कुछ लोगों द्वारा मिलीभगत के जरिए वसूली की जा रही है। जानकारी के अनुसार 50 प्रतिशत ब्याज माफ कराने पर 10 प्रतिशत और 75 प्रतिशत ब्याज माफ कराने पर 15 प्रतिशत तक की रकम ली जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया में एक बाहरी व्यक्ति, जिसे दलाल बताया जा रहा है, एआरटीओ के कक्ष के बाहर बैठकर वसूली करता है।
मिली जानकारी के मुताबिक, इस मामले में एक ट्रक मालिक संतोष सिंह गोल्डेन का प्रकरण सामने आया है। उनके ट्रक संख्या यूपी-67-पी-8712 पर बकाया टैक्स के रूप में 35,152 रुपये का ब्याज लगा था। उन्होंने उप परिवहन आयुक्त (डीटीसी) भीमसेन सिंह और आरटीओ से ब्याज माफ करने की गुहार लगाई। अधिकारियों ने एआरटीओ को 50 प्रतिशत ब्याज माफ करने के निर्देश दिए, लेकिन एआरटीओ ने नियमों का हवाला देते हुए उनकी बात को अनदेखा कर दिया।
इसके बाद परेशान ट्रक मालिक ने एआरटीओ कक्ष के बाहर बैठे दलाल से संपर्क किया। दलाल ने उन्हें बताया कि वह 35,150 रुपये के ब्याज पर 50 प्रतिशत माफी दिला सकता है, जिसके लिए उसने एक निश्चित राशि ली। इस पर ट्रक मालिक ने एआरटीओ को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि दलाल, ट्रक मालिक और एआरटीओ से भी बड़ा बन गया है।
दरअसल एआरटीओ (प्रशासन) को यह विशेषाधिकार प्राप्त है कि वह बकाया टैक्स पर लगे ब्याज को माफ कर सकते हैं, लेकिन यह सुविधा केवल उन वाहन मालिकों के लिए है जो गंभीर बीमारी या अन्य कारणों से परिवहन कार्यालय नहीं पहुंच पाते। इसके लिए वाहन मालिक को मेडिकल रिपोर्ट और शपथपत्र देना आवश्यक होता है। यदि कोई गलत जानकारी या फर्जी मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि परिवहन कार्यालय में ऐसी कोई स्पष्ट प्रक्रिया नजर नहीं आती। आरोप है कि फर्जी मेडिकल रिपोर्ट और शपथपत्र के माध्यम से लाखों रुपये के राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इस संबंध में जब एआरटीओ से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वाहन मालिक दबाव बनाने के लिए इस तरह के आरोप लगा रहे हैं।
मामले को गंभीर बताते हुए आरटीओ (प्रशासन) राघवेन्द्र सिंह ने कहा कि बिना उचित दस्तावेजों के ब्याज माफ करना गलत है और इस पर ध्यान दिया जाएगा। यह प्रकरण परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है और इसकी जांच की आवश्यकता बताई जा रही है।
