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धर्म-कर्म

दशहरे पर होगा 47 मिनट का विजय मुहूर्त, आज 77 जगह रावण के पुतले का दहन

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वाराणसी। असत्य पर सत्य की जीत का महापर्व विजयदशमी इस साल 12 अक्तूबर को मनाया जाएगा। इस दिन रावण के पुतले का दहन और दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। इस बार दशमी तिथि 22 घंटे 32 मिनट तक और श्रवण नक्षत्र 23 घंटे 18 मिनट तक रहेगा। विजयदशमी पर केवल 47 मिनट का विजय मुहूर्त भी बन रहा है।

ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार, आश्विन शुक्ल दशमी को श्रवण नक्षत्र के संयोग से विजयदशमी का उत्सव मनाया जाता है। काशी के पंचांगों के अनुसार, आश्विन शुक्ल दशमी तिथि 12 अक्तूबर को भोर में 05:47 बजे से शुरू होकर 13 अक्तूबर की भोर 04:19 बजे तक रहेगी। इसी दिन नवरात्र व्रत का पारण भी होगा और सायंकाल दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। श्रवण नक्षत्र 11/12 की रात 01:34 बजे प्रारंभ होगा, जो 12/13 की मध्यरात्रि 12:52 बजे तक रहेगा। शाम को विजयतारा के उदय होने के समय विजयकाल भी रहेगा। इस बार विजय मुहूर्त दिन में 01:55 बजे से 02:42 बजे तक रहेगा। विजय मुहूर्त में किए गए कार्य में विजय प्राप्त होती है, इसलिए इसे अपुच्छ मुहूर्त भी कहा जाता है।

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने पंपासुर के जंगल की समस्त वानरी सेना को साथ लेकर आश्विन सुदी दशमी की श्रवण नक्षत्र वाली रात्रि में प्रस्थान कर लंकापुरी पर चढ़ाई की थी। जिसका परिणाम यह हुआ कि राक्षसराज रावण का नाश होकर भगवान श्रीराम की विजय हुई। इसलिए यह दिन अतिपवित्र माना गया है।

इस वर्ष, जिले में 12 अक्तूबर को बरेका सहित 77 स्थानों पर रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। प्रत्येक स्थान पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक दरोगा और दो सिपाहियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा 13 अक्तूबर को नाटी इमली मैदान में विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप का आयोजन होगा जिसके कारण नाटी इमली मैदान की ओर जाने वाले मार्गों पर प्रतिबंध रहेगा। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के वीसी आवास की दिशा में, राम कटोरा के संपर्क मार्गों और चौकाघाट से आने वाले मार्गों पर बैरिकेडिंग की जाएगी।

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