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वाराणसी

जागरूकता और सम्पूर्ण इलाज से ही खत्म होगी टीबी : सीएमओ 

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पोषण पोटली का हुआ वितरण

वाराणसी। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम व टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत शनिवार को निक्षय दिवस के अवसर पर शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुर्गाकुंड, काशी विद्यापीठ, चौकाघाट,शिवपुर, भेलूपुर, मंडुवाडीह, एलबीएस हॉस्पिटल रामनगर और पीएचसी हरहुआ में पोषण पोटली का वितरण किया गया।

इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ संदीप चौधरी के निर्देशन में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ पीयूष राय ने 15 गोद लिए मरीजों को शहरी सामुदायिक केंद्र दुर्गाकुंड में पोषण पोटली वितरित किया। इसकी जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदीप चौधरी ने दी।

उन्होंने बताया कि टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है। वर्तमान में मेडिकल साइंस ने बहुत तरक्की की है। जनपद में टीबी के मरीजों का बेहतर इलाज सरकारी चिकित्सालयों में किया जा रहा है। लेकिन सबसे खास बात यह है कि मरीज को अपना सम्पूर्ण इलाज कराना होगा यदि एक भी दिन वह दवा खाने से चूकता है तो यह नुकसानदेह साबित हो सकता है।

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जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. पीयूष राय ने कहा कि जिले में जनवरी 2024 से अब तक 15880 टीबी मरीज पंजीकृत किये गये हैं। वर्तमान में कुल 7002 मरीजों का उपचार चल रहा है, इनमें  673 मरीज मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट के हैं। जिले में अभी 56 अधिकृत माइक्रो स्कोपी सेंटर (डीएमसी) एवं 4 सीबी नाट लैब तथा 7 ट्रू नेट लैब हैं। जनपद में कुल 2568 निक्षय मित्र पंजीकृत हैं।

अब तक 13400 पोषण पोटली का वितरण किया जा चुका है और वर्ष 2023 में 46 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित की जा चुकी हैं। जहाँ सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पताल भी इस मुहिम को आगे बढ़ाने में अग्रसर हैं। मरीजों को उनके खाते में निक्षय पोषण योजना के तहत 500 रुपये प्रति माह कि जगह अब 1000 रुपये की धनराशि नवम्बर 2024 से दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि दो हफ्ते से खांसी, भूंख ना लगना, वजन में कमी और बुखार आना टीबी रोग के प्रमुख लक्षण हैं| इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वहीं जिन्हें दो हफ्ते से अधिक खांसी आ रही हो या खाँसने पर बलगम के साथ खून आ रहा हो तो उन्हें तत्काल नजदीकी सरकारी चिकित्सालय में अपने बलगम की जांच करानी चाहिए। उन्होंने बताया कि समय से रोग का पता चल जाने से इसे अन्य मरीजों में फैलने से रोका जा सकता हैं।

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