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गाजीपुर

जज शशिकांत राय की सादगी बनी मिसाल, गांव में दिखा कृष्ण-सुदामा सा अपनापन

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भांवरकोल (गाजीपुर) जयदेश। बिहार के अररिया जिले में पॉक्सो विशेष न्यायालय के न्यायाधीश रहते हुए एक ही दिन में सुनवाई, गवाही, बहस और सजा सुनाकर राष्ट्रीय स्तर पर रिकॉर्ड बनाने वाले न्यायाधीश शशिकांत राय इन दिनों अपने पैतृक गांव कनुवान में भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। न्यायिक सेवा में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने के बावजूद उनकी सादगी, मिलनसारिता और सहज व्यवहार ने गांव के लोगों का दिल जीत लिया है।

समस्तीपुर (बिहार) में जिला जज के पद पर कार्यरत शशिकांत राय ने अररिया में पदस्थापना के दौरान 15 दिसंबर 2021 को पॉक्सो एक्ट के एक गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। सात वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म के आरोपी को उन्होंने एक ही दिन में आरोप गठन, गवाही, बहस और सुनवाई पूरी करते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जिसमें अभियुक्त को अंतिम सांस तक जेल में रहने का आदेश दिया गया। इस त्वरित न्यायिक कार्रवाई को बिहार सरकार के गृह विभाग के अभियोजन निदेशालय, पटना ने राष्ट्रीय स्तर पर एक नया रिकॉर्ड बताया है। इससे पहले मध्य प्रदेश के दतिया स्थित पॉक्सो विशेष न्यायालय में तीन दिनों में सुनवाई पूरी होने का रिकॉर्ड दर्ज था, जिसे इस फैसले ने पीछे छोड़ दिया।

न्यायिक क्षेत्र में इतनी बड़ी उपलब्धि के बावजूद शशिकांत राय जब भी अपने पैतृक गांव कनुवान आते हैं, तो पूरी तरह गांव की सादगी में घुल-मिल जाते हैं। हाल ही में होली के अवसर पर वे बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के साथ रंग-गुलाल खेलते हुए नजर आए। उनके सहज और आत्मीय व्यवहार को देखकर गांव के लोग आश्चर्यचकित रह गए कि इतने बड़े पद पर आसीन होने के बावजूद उनके भीतर जरा भी अहंकार नहीं है।

ग्रामीणों का कहना है कि शशिकांत राय का व्यवहार बिल्कुल पारिवारिक और आत्मीय है। वे सभी लोगों से समान भाव से मिलते हैं और समाज में सद्भाव, सम्मान और आपसी प्रेम का संदेश देते हैं। गांव में उनके व्यक्तित्व में लोगों को मानो कृष्ण-सुदामा जैसी आत्मीयता और सरलता की झलक दिखाई देती है।

ग्रामीणों का कहना है कि न्यायिक सेवा में रहते हुए जहां उन्होंने त्वरित न्याय का उदाहरण प्रस्तुत किया है, वहीं अपने गांव में सादगी और अपनत्व से लोगों का दिल जीत लिया है। ऐसे व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणा बनते हैं और यह संदेश देते हैं कि ऊंचे पद पर पहुंचकर भी जड़ों से जुड़ा रहना ही सच्ची महानता है।

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