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गोरखपुर

छह साल पहले मरी महिला को जिंदा दिखाकर रजिस्ट्री,आरोपी गिरफ्तार

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गोरखपुर। हाल ही में सामने आया एक सनसनीखेज जमीन घोटाला पूरे पूर्वांचल को हिला देने वाला है। यह मामला केवल धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी व्यवस्था और दस्तावेजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि एक महिला की मौत के छह साल बाद भी उसे “जिंदा” दिखाकर न सिर्फ आधार और पैन कार्ड बनवाए गए, बल्कि बैंक खाता खोलकर जमीन की रजिस्ट्री कराने की कोशिश भी की गई।यह मामला गोरखपुर जिले के खोराबार थाना क्षेत्र के ताल कंदला गांव का है। यहां मृत महिला चंद्रावती देवी, पत्नी स्व. राघव मिश्र, के नाम पर यह पूरी साजिश रची गई।

चंद्रावती देवी की मृत्यु 23 मार्च 2019 को हो चुकी थी और नगर निगम से आधिकारिक मृत्यु प्रमाणपत्र भी जारी हो गया था। इसके बावजूद जालसाजों ने उन्हें जिंदा साबित कर जमीन पर कब्जा करने का षड्यंत्र रचा।चंद्रावती देवी के पुत्र महेश्वर मिश्र इस घोटाले के सबसे बड़े पीड़ित हैं।

उनके पिता राघव मिश्र के निधन के बाद परिवार की जमीन चंद्रावती देवी के नाम दर्ज थी। वर्ष 2019 में उनकी माता का भी निधन हो गया और तब से महेश्वर विरासत की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में लगे हुए थे। कुछ महीने पहले जब उन्होंने तहसील में जमीन की स्थिति ऑनलाइन चेक की तो उन्हें आश्चर्य हुआ कि उसी जमीन से जुड़ी गतिविधियाँ लगातार अपडेट हो रही हैं।

यहीं से पूरी साजिश का पर्दाफाश हुआ। महेश्वर को पता चला कि उनकी मृत मां के नाम से फर्जी आधार और पैन कार्ड बनाकर बैंक ऑफ इंडिया की गोरखनाथ शाखा में खाता खोला गया और जमीन की रजिस्ट्री कराने की तैयारी चल रही थी।महेश्वर मिश्र का कहना है, “यह मेरे लिए किसी सदमे से कम नहीं था।

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मां को खोए छह साल हो गए, लेकिन कुछ लोगों ने उन्हें जिंदा बताकर उनकी जमीन हड़पने की कोशिश की। अगर समय रहते हमें जानकारी न मिलती, तो हमारी पुश्तैनी जमीन हमारे हाथ से निकल जाती।”पुलिस जांच में सामने आया कि जालसाजों ने पहले चंद्रावती देवी के नाम पर नकली आधार और पैन कार्ड बनवाए।

उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाता खोला गया। इसके बाद आरोपी रजिस्ट्री की प्रक्रिया की ओर बढ़े। योजना यह थी कि चंद्रावती देवी को जिंदा दिखाकर उनकी सहमति से जमीन औने-पौने दाम पर बेच दी जाए। इस पूरे खेल में स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों और कुछ सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत होने की आशंका गहराती जा रही है।

खोराबार पुलिस ने इस घोटाले में छह लोगों को आरोपी बनाया है, जिनमें एक लेखपाल भी शामिल है। लेखपाल की भूमिका सबसे संदिग्ध मानी जा रही है क्योंकि बिना सरकारी सहयोगियों के ऐसे फर्जी दस्तावेजों का लंबे समय तक इस्तेमाल संभव नहीं। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और पूछताछ जारी है। अधिकारियों का कहना है कि यह साधारण धोखाधड़ी नहीं बल्कि संगठित अपराध है।

यह मामला उजागर होते ही स्थानीय प्रशासन पर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिना तहसील और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत के इतने बड़े पैमाने पर जालसाजी संभव ही नहीं। गांव के बुजुर्ग रामआसरे का कहना है, “आज अगर चंद्रावती देवी को जिंदा दिखाया जा सकता है, तो कल हमारे नाम पर भी फर्जीवाड़ा हो सकता है। जब तक अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, आम जनता सुरक्षित नहीं है।

“सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे सिस्टम की नाकामी बताया है और मांग की है कि दोषी कर्मचारियों पर न केवल निलंबन बल्कि आपराधिक धाराओं में भी सख्त कार्रवाई हो। इस मामले में धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज बनाना, साजिश और सरकारी काम में बाधा डालने जैसी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। अगर आरोप साबित होते हैं तो दोषियों को सात से दस साल तक की सजा हो सकती है।

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गोरखपुर का यह केस कई वजहों से अहम है। यह दिखाता है कि कैसे तकनीकी खामियों और भ्रष्टाचार का फायदा उठाकर मृत व्यक्ति को भी जिंदा दिखाया जा सकता है। यह सवाल खड़ा करता है कि आधार, पैन और बैंकिंग जैसी संवेदनशील प्रणालियाँ कितनी सुरक्षित हैं। यह उन हजारों परिवारों के लिए चेतावनी भी है, जिनकी जमीनों पर निगाहें गड़ी रहती हैं।

फिलहाल पुलिस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है और आरोपियों से पूछताछ के दौरान यह भी पता लगाने की कोशिश हो रही है कि कहीं ऐसे और मामले तो नहीं चल रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को जमीन और संपत्ति से जुड़ी रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और बायोमेट्रिक आधारित करना चाहिए, ताकि मृत व्यक्ति के नाम पर धोखाधड़ी की कोई गुंजाइश न बचे।

गोरखपुर लैंड स्कैम 2025 केवल एक परिवार की परेशानी नहीं बल्कि पूरे समाज और सिस्टम के लिए चेतावनी है। यह घटना बताती है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही मिलकर कैसे किसी भी व्यक्ति के अधिकारों पर डाका डाल सकते हैं। अब देखना यह होगा

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