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गोरखपुर

गोरखपुर की स्वच्छ हवा के लिए 75 करोड़ की कार्ययोजना को मिली मंजूरी

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गोरखपुर। शहर की हवा को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत करीब 75 करोड़ रुपये की लागत से तैयार विस्तृत कार्ययोजना को नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल की अध्यक्षता में बनी नगर स्तरीय समिति ने मंजूरी दे दी है। इस योजना का उद्देश्य शहर में वायु प्रदूषण को कम करना, यातायात व्यवस्था को सुधारना और हरित क्षेत्र को बढ़ाना है।

इस योजना के तहत शहर की प्रमुख सड़कों और चौराहों में व्यापक बदलाव किए जाएंगे। कई मुख्य सड़कों की चौड़ाई बढ़ाई जाएगी और चौराहों को नए सिरे से डिजाइन किया जाएगा, ताकि जाम की समस्या कम हो सके। सड़कों का एंड-टू-एंड पक्कीकरण, ब्लैक टॉपिंग और नियमित रखरखाव सुनिश्चित किया जाएगा। इससे सड़कों से उड़ने वाली धूल में कमी आएगी, जो वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण होती है। बेहतर सड़क व्यवस्था के कारण वाहनों को बार-बार रुकना नहीं पड़ेगा, जिससे ईंधन की खपत कम होगी और धुएं का उत्सर्जन भी घटेगा। इससे लोगों को सुरक्षित और सुगम यात्रा का लाभ मिलेगा।

शहर को हराभरा बनाने के लिए बड़े पैमाने पर पौधारोपण की भी योजना तैयार की गई है। करीब 2,70,913 वर्गमीटर क्षेत्र में पौधे लगाए जाएंगे। इसके तहत पांच प्रमुख मार्गों के किनारे हरियाली विकसित की जाएगी। साथ ही महेसरा क्षेत्र में मियावाकी पद्धति से घने वन विकसित किए जाएंगे।

मियावाकी पद्धति से लगाए गए पौधे कम समय में घने जंगल का रूप ले लेते हैं। ये वन कार्बन डाइऑक्साइड को सोखकर ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाते हैं, जिससे खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को राहत मिलेगी। इसके साथ ही शहर के तापमान को संतुलित रखने और हीट आइलैंड प्रभाव को कम करने में भी मदद मिलेगी।

पौधारोपण के लिए जिन प्रमुख स्थानों को चिन्हित किया गया है, उनमें डोमिनगढ़ से महेसरा ओवरब्रिज रोड किनारे लगभग 40,000 वर्ग मीटर, ट्रांसपोर्टनगर से डोमिनगढ़ रोड 25,000 वर्ग मीटर, एकला बांध से बाईपास रोड तक 11,800 वर्ग मीटर, नौसढ़ से बगहा बाघागाड़ा रोड 1,280 वर्ग मीटर, ट्रांसपोर्टनगर से बाईपास रोड 30,231 वर्ग मीटर तथा महेसरा क्षेत्र में मियावाकी वन सहित 1,62,602 वर्ग मीटर हरित क्षेत्र शामिल है।

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यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शहर के चार प्रमुख ट्रैफिक जंक्शनों को आधुनिक तरीके से फिर से डिजाइन किया जाएगा। वहां नया और आधुनिक सिग्नल सिस्टम लगाया जाएगा, जिससे वाहनों का अनावश्यक रुकना कम होगा। इससे ध्वनि और वायु प्रदूषण दोनों में कमी आएगी, समय की बचत होगी और शहर की कार्यक्षमता बढ़ेगी।

वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए नगर निगम गोलघर समेत तीन स्थानों पर प्रदूषण मापक यंत्र लगाएगा, जिस पर करीब 1.50 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अतिरिक्त राजघाट शवदाह गृह और कान्हा उपवन पशु शवदाह गृह में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए विशेष उपकरण लगाए जाएंगे। ये उपकरण सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और धूल के कण जैसे प्रदूषकों को हवा में जाने से पहले ही फ़िल्टर या सोख लेंगे।

इस समग्र योजना के माध्यम से नगर निगम का लक्ष्य शहर की हवा को स्वच्छ बनाना, प्रदूषण के स्तर को घटाना और नागरिकों को बेहतर पर्यावरण उपलब्ध कराना है।

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